संसद में तीन दिन का विशेष सेशन बुला हुआ है संसद में महिला आरक्षण पर लगातार बहस चल रही है। शुक्रवार को महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन से संबंधित बिल पर बहस खत्म होगी इसके बाद वोटिंग होगी। संसद में महिला बिल पर आधी रात तक बहस हुई जबकि सरकार ने 2023 में महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए अधिसूचना जारी की अब सवाल उठता है कि 2023 के कानून को संशोधन पर चर्चा के बीच अचानक लागू क्यों किया गया संसद में भी विपक्ष यही प्रश्न पूछता है

केंद्रीय विधि मंत्रालय ने कल गुरुवार रात जारी एक अधिसूचना में कहा कि महिला आरक्षण अधिनियम 2023 विधायिका में आरक्षण की व्यवस्था करता है गुरुवार से लागू हो गया है सूत्रों का कहना है कि 2023 कानून की अधिसूचना अचानक क्यों जारी की गई वह एक तकनीकी और प्रक्रियागत कदम है। सरकार की इस कार्रवाई को विपक्ष ने नकार दिया है। जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई विपक्षी सांसदों ने इस मुद्दे पर हंगामा किया और पूछा कि चर्चा के दौरान कानून लागू क्यों किया गया। DMK सांसद कनिमोझी ने लोकसभा में कहा
वास्तव में 2023 के कानून के अनुसार वर्तमान जनगणना और परिसीमन के बाद से महिला आरक्षण लागू होना चाहिए। 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन आयोग की रिपोर्ट पर आरक्षण लागू करने का प्रावधान भी इसी विधेयक में संशोधन कर रहे हैं इसलिए 2023 का कानून जारी किया गया ताकि संशोधन किया जा सके
2023 में देश में महिला आरक्षण अधिनियम लागू हुआ जो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देता है हालाँकि संसद में इस कानून को बदलने और 2029 में लागू करने पर जारी चर्चा के बीच 2023 के कानून को अचानक से लागू करने का कारण पता नहीं चला। इसके पीछे तकनीकी कमियां बताई जाती हैं
जरी अधिसूचना के अनुसार केंद्र सरकार ने संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम 2023 की धारा 1 की उपधारा (2) से मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए 16 अप्रैल 2026 को इस कानून के प्रावधान लागू होने की तिथि घोषित की सितंबर 2023 में संसद ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया। महिला आरक्षण अधिनियम इस बिल का नाम है
कांग्रेस के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने इस सूचना को विचित्र बताया। उनका कहना था सितंबर 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम गुरुवार से लागू हो गया है जबकि इसमें संशोधनों पर संसद में बहस चल रही है और शुक्रवार को वोटिंग होनी है मैं बहुत हैरान हूँ







