उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपने अंदरूनी समीकरणों के अनुसार मंत्रिमंडल विस्तार की रणनीति तैयार कर ली है। पार्टी का मुख्य लक्ष्य प्रदेश के हर जिले से प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है। सूत्रों के अनुसार, संभावित मंत्रिमंडल विस्तार में ऐसे जिलों के नेताओं को दर्जा प्राप्त मंत्री का पद दिया जाएगा, जिनका अभी तक कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। वहीं जिन जिलों में पहले से ही मंत्रियों की संख्या अधिक है, वहां कुछ पद घटाकर संतुलन बनाए जाने की योजना है।

क्षेत्रीय असमानता दूर करने की योजना
वर्तमान योगी मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय असमानता स्पष्ट नजर आती है। आगरा, वाराणसी, अलीगढ़, कानपुर देहात और शाहजहांपुर जैसे पांच जिलों से तीन-तीन मंत्री हैं, जबकि प्रदेश के करीब 40 जिलों का मंत्रिमंडल में शून्य प्रतिनिधित्व है। बीजेपी इस असंतुलन को दूर करने के लिए पूरी तैयारी कर रही है। पार्टी का उद्देश्य है कि 2027 के चुनाव से पहले हर जिले के कार्यकर्ता और जनता को यह संदेश जाए कि सरकार में उनकी सीधी भागीदारी है। यह कदम पार्टी के भीतर उत्साह और सहयोग बढ़ाने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
निगम, बोर्ड और आयोगों से भी संतुलन साधा जाएगा
मंत्रिमंडल विस्तार के साथ ही खाली पड़े निगमों, बोर्डों और आयोगों के पदों को भरने की भी योजना है। जिन क्षेत्रीय और जातीय नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली, उन्हें इन पदों पर समायोजित करके मुख्यधारा में लाया जाएगा। पार्टी सूत्रों का कहना है कि बड़े फेरबदल के बजाय छोटे-छोटे समायोजन से क्षेत्रीय और जातीय संतुलन कायम किया जाएगा। इस रणनीति का मकसद पार्टी को एकजुट रखना और चुनावी मैदान में मजबूती से उतरना है।
कोर वोट बैंक मजबूत करने की रणनीति
बीजेपी का विस्तार और पदों का बंटवारा मुख्य रूप से कोर वोट बैंक—अगड़ा वर्ग, गैर-यादव पिछड़ा और गैर-जाटव एससी वर्ग—के इर्द-गिर्द बुना जा रहा है। 2024 लोकसभा चुनाव में यह सामाजिक समीकरण पार्टी के लिए अजेय साबित हुए थे। सूत्रों के अनुसार, मंत्रिमंडल विस्तार में छह खाली पदों को भरने के साथ-साथ आधा दर्जन मंत्रियों के विभागों में बदलाव की संभावना है। पार्टी का मानना है कि हर जिले से मंत्री या दर्जा प्राप्त मंत्री बनने से कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ेगा और 2027 में बीजेपी को रणनीतिक लाभ मिलेगा।








