CBSE की On Screen Marking OSM प्रणाली को लेकर देशभर में गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। कक्षा 12 के परिणाम जारी होने के बाद छात्रों और अभिभावकों ने मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि परिणामों में कई असमानताएं और तकनीकी त्रुटियां देखने को मिलीं जिससे पूरी प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठ गया है। इस बीच ड्राई रन में शामिल शिक्षकों और स्कूल प्रमुखों के अनुभव भी सामने आए हैं जिन्होंने इस प्रणाली को लागू करने से पहले और अधिक परीक्षण की जरूरत बताई है। सबसे बड़ा सवाल यही बन गया है कि क्या CBSE ने शुरुआती चेतावनियों को पर्याप्त गंभीरता से लिया था या नहीं।

ड्राई रन में सामने आई तकनीकी कमजोरियां
ड्राई रन दिसंबर के अंत और जनवरी की शुरुआत में आयोजित किया गया था जिसमें शिक्षकों को अपने स्कूलों से ऑनलाइन शामिल किया गया। CBSE ने उन्हें लॉगिन आईडी और क्रेडेंशियल्स उपलब्ध कराए थे। आधे घंटे के इस परीक्षण में ही कई तकनीकी समस्याएं सामने आ गईं। कई शिक्षक लॉगिन नहीं कर पाए। कुछ को OTP प्राप्त नहीं हुआ। कई उत्तर पुस्तिकाएं स्क्रीन पर दिखाई ही नहीं दीं। कुछ मामलों में कॉपियां अपलोड नहीं हो सकीं। शिक्षकों का कहना है कि यह स्पष्ट संकेत था कि सिस्टम पूरी तरह तैयार नहीं है। इसके बावजूद प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया जिससे अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या परीक्षण अवधि पर्याप्त थी या नहीं।
मूल्यांकन प्रक्रिया में व्यावहारिक कठिनाइयां
ड्राई रन में शिक्षकों को पहले से जांची हुई उत्तर पुस्तिकाओं पर अभ्यास कराया गया ताकि वे डिजिटल मूल्यांकन को समझ सकें। लेकिन कई शिक्षकों ने बताया कि स्क्रीन पर जांच करना पेन पेपर प्रणाली की तुलना में अधिक समय ले रहा था। इंटरनेट की गति भी बड़ी समस्या बनी। कई बार क्लिक करने पर भी सिस्टम प्रतिक्रिया नहीं देता था। कुछ शिक्षकों ने निजी लैपटॉप और बेहतर इंटरनेट पर काम करने पर बेहतर अनुभव बताया। इसके साथ ही उम्र और तकनीकी दक्षता का अंतर भी सामने आया। युवा शिक्षक तेजी से सिस्टम समझ रहे थे जबकि अधिक उम्र के शिक्षकों को कठिनाई हो रही थी। इससे प्रशिक्षण व्यवस्था पर भी सवाल उठे।
गंभीर शिकायतें और CBSE का पक्ष
ड्राई रन और वास्तविक मूल्यांकन के दौरान कई गंभीर समस्याएं सामने आईं। शिक्षकों के अनुसार कुछ मामलों में अंक सही तरीके से अपडेट नहीं हो रहे थे। कई उत्तर पुस्तिकाओं के हिस्से स्क्रीन पर दिखाई नहीं दे रहे थे। Undo विकल्प इस्तेमाल करने पर सिस्टम हैंग हो जाता था। कई कॉपियां सेव नहीं हो पा रही थीं। वास्तविक मूल्यांकन में तो स्थिति और भी जटिल बताई गई जहां हजारों में से सैकड़ों कॉपियां धुंधली या आंशिक रूप से स्कैन मिलीं। वहीं CBSE का कहना है कि ड्राई रन के बाद सिस्टम में कई सुधार किए गए हैं जैसे सर्वर क्षमता बढ़ाना और इंटरफेस को बेहतर बनाना। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इतनी महत्वपूर्ण परीक्षा प्रणाली को लागू करने से पहले और व्यापक परीक्षण होना चाहिए था या नहीं।








