भारत में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों और घुसपैठियों को लेकर लंबे समय से बहस जारी है। इस बीच विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि किसी भी विदेशी नागरिक को देश से बाहर भेजने यानी निर्वासित करने की एक तय कानूनी और द्विपक्षीय प्रक्रिया होती है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत सरकार कानून के अनुसार कार्रवाई करती है और किसी भी व्यक्ति को बिना आवश्यक सत्यापन के निर्वासित नहीं किया जाता। सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के मामलों की लगातार समीक्षा की जा रही है। इस बयान के बाद यह साफ हो गया है कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर जल्दबाजी नहीं बल्कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत कदम उठा रही है।

ऐसे होती है विदेशी नागरिकों की वतन वापसी
विदेश मंत्रालय के अनुसार जब किसी विदेशी नागरिक के अवैध रूप से भारत में रहने की जानकारी सामने आती है तो उसका मामला संबंधित देश के समक्ष भेजा जाता है। उदाहरण के तौर पर यदि कोई व्यक्ति खुद को बांग्लादेशी नागरिक बताता है तो उसकी पहचान और राष्ट्रीयता की पुष्टि के लिए मामला बांग्लादेश सरकार के पास भेजा जाता है। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि संबंधित देश द्वारा नागरिकता की पुष्टि किए जाने के बाद ही निर्वासन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है। उन्होंने बताया कि भारत और बांग्लादेश के बीच इस संबंध में एक द्विपक्षीय व्यवस्था मौजूद है। वर्तमान में ऐसे कई मामले बांग्लादेश के पास लंबित हैं और भारत को उम्मीद है कि उन पर जल्द कार्रवाई होगी ताकि अवैध रूप से रह रहे लोगों की वतन वापसी प्रभावी तरीके से हो सके। सरकार का मानना है कि यह प्रक्रिया दोनों देशों के सहयोग से ही सफल हो सकती है।
नेपाल के साथ संबंधों को नई मजबूती देने की तैयारी
विदेश मंत्रालय की ब्रीफिंग में नेपाल के विदेश मंत्री की भारत यात्रा पर भी चर्चा हुई। रणधीर जायसवाल ने बताया कि नेपाल के विदेश मंत्री भारत पहुंच चुके हैं और उनकी मुलाकात भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से होगी। भारत और नेपाल के बीच विकास सहयोग, व्यापार, निवेश और लोगों के बीच संबंधों को और मजबूत बनाने पर बातचीत होने की संभावना है। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्ते पहले से ही बेहद मजबूत रहे हैं। ऐसे में यह बैठक द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है। विदेश मंत्रालय ने संकेत दिए हैं कि भारत नेपाल के साथ अपनी साझेदारी को और गहरा बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और भविष्य में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर सहयोग बढ़ाया जा सकता है।
रक्षा और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी नजर
ब्रीफिंग के दौरान रूस के उन्नत लड़ाकू विमान Sukhoi Su-57 को लेकर भी सवाल पूछे गए। हालांकि विदेश मंत्रालय ने इस विषय पर विस्तृत टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि इस संबंध में जानकारी रक्षा मंत्रालय से प्राप्त की जा सकती है। रणधीर जायसवाल ने केवल इतना कहा कि भारत और रूस के बीच रक्षा संबंध लंबे समय से मजबूत रहे हैं और दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग लगातार जारी है। विदेश मंत्रालय के ताजा बयानों से यह स्पष्ट होता है कि भारत एक ओर अवैध प्रवास और सीमा सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सख्त रुख बनाए हुए है तो दूसरी ओर अपने पड़ोसी देशों के साथ सहयोग और कूटनीतिक संबंधों को भी नई मजबूती देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर सरकार के अगले कदमों पर सभी की नजर बनी रहेगी।






