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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला क्या अब महिला अधिकारियों को मिलेगा पूरा हक

By Neha
On: Tuesday, March 24, 2026 2:02 PM
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला क्या अब महिला अधिकारियों को मिलेगा पूरा हक
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देश की शीर्ष अदालत Supreme Court of India ने सेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन के तहत काम कर चुकी महिला अधिकारियों को बड़ी राहत देते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि जिन महिला अधिकारियों को परमानेंट कमीशन नहीं मिला, उन्हें अब पूर्ण पेंशन का अधिकार मिलेगा। यह फैसला उन सैकड़ों महिला अफसरों के लिए उम्मीद की किरण बनकर आया है, जिन्हें वर्षों से अपने हक के लिए लड़ना पड़ रहा था। कोर्ट ने साफ किया कि सेवा पूरी न करने के बावजूद उन्हें 20 साल की सेवा पूरी मानकर पेंशन दी जाएगी।

मूल्यांकन प्रक्रिया में बड़ी खामियां उजागर

फैसला सुनाते हुए बेंच ने कहा कि महिला अधिकारियों की एसीआर यानी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट को कई मामलों में लापरवाही से तैयार किया गया। कोर्ट ने माना कि यह सोच बनी रही कि महिलाओं को आगे बढ़ने का मौका नहीं मिलेगा, जिससे उनके मूल्यांकन पर नकारात्मक असर पड़ा। इस कारण कई योग्य अधिकारी भी पीछे रह गईं। कोर्ट ने इस पूरी प्रक्रिया को अनुचित बताते हुए कहा कि इससे महिलाओं के करियर और सम्मान दोनों को नुकसान हुआ।

जल्दबाजी में बने नियमों से हुआ नुकसान

कोर्ट ने वायुसेना और अन्य बलों के मामलों में भी टिप्पणी करते हुए कहा कि 2019 में बनाए गए नियम जल्दबाजी में लागू किए गए थे। इन नियमों में सेवा अवधि और प्रदर्शन के जो मानक तय किए गए, उन्हें पूरा करने का पर्याप्त समय महिला अधिकारियों को नहीं दिया गया। इसी वजह से उन्हें परमानेंट कमीशन से वंचित रहना पड़ा। कोर्ट ने यह भी कहा कि मूल्यांकन के मानकों को पारदर्शी नहीं रखा गया, जिससे अधिकारियों को सही जानकारी नहीं मिल सकी और उनके साथ न्याय नहीं हो पाया।

पेंशन 1 नवंबर 2025 से लागू, लेकिन बहाली नहीं

कोर्ट ने निर्देश दिया कि सभी पात्र महिला अधिकारियों को 1 नवंबर 2025 से पेंशन का लाभ दिया जाएगा और उन्हें 20 साल की सेवा पूरी मानी जाएगी। हालांकि कोर्ट ने दोबारा सेवा में बहाल करने की मांग को स्वीकार नहीं किया, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि ऑपरेशनल कारणों का हवाला देकर आर्थिक अधिकार नहीं छीने जा सकते। अदालत ने यह भी कहा कि सेना किसी एक लिंग की जागीर नहीं है और महिलाओं को बराबरी का अधिकार मिलना चाहिए। यह फैसला आने वाले समय में सशस्त्र बलों में लैंगिक समानता को मजबूत करेगा।

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