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सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार पर उठाए सवाल, डीजीपी नियुक्ति में राजनीतिक हस्तक्षेप

By Neha
On: Thursday, March 12, 2026 6:06 PM
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार पर उठाए सवाल, डीजीपी नियुक्ति में राजनीतिक हस्तक्षेप
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पश्चिम बंगाल में डीजीपी की नियुक्ति और उससे जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की है। मुख्य न्यायधीश (CJI) सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि ‘पश्चिम बंगाल सरकार राज्यसभा में डीजीपी को भेजने में ज्यादा व्यस्त है’। दरअसल, पश्चिम बंगाल के पूर्व DGP राजीव कुमार को टीएमसी के टिकट पर राज्यसभा के लिए चुना गया है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में राज्य सरकार की नियुक्ति प्रक्रिया और उसके राजनीतिक हस्तक्षेप पर सवाल उठा रही है।

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी

इससे पहले 5 फरवरी, 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि राज्य दो साल के तय समय वाले रेगुलर DGP की नियुक्ति से बच रहे हैं और इसके बजाय अपनी पसंद के एक्टिंग पुलिस चीफ नियुक्त कर रहे हैं। कोर्ट ने 2006 के प्रकाश सिंह केस का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि DGP के ऑफिस को राजनीतिक या बाहरी दबाव से अलग रखा जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने सरकारों को पॉलिटिक्स और लॉ एनफोर्समेंट को मिलाने के खिलाफ चेतावनी दी थी।

राजीव कुमार का विवादास्पद करियर

राजीव कुमार का करियर विवादों से भरा रहा है। उन्होंने पश्चिम बंगाल पुलिस में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया, लेकिन राजनीतिक घटनाओं में उनका नाम अक्सर सामने आता रहा। 3 फरवरी, 2019 को कोलकाता में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शारदा डिपॉजिट कलेक्शन स्कैम की जांच के सिलसिले में CBI अधिकारियों द्वारा राजीव कुमार के घर पर अचानक छापे डालने के बाद अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया। यह घटना तब हुई जब पश्चिम बंगाल में कानून और राजनीति के बीच तनाव चरम पर था।

डीजीपी नियुक्ति और राज्यसभा चुनाव का राजनीतिक असर

राजीव कुमार के राज्यसभा जाने से पश्चिम बंगाल की राजनीतिक तस्वीर और भी जटिल हो गई है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों ने साफ किया कि राज्य सरकार का ध्यान डीजीपी के नियमित अपॉइंटमेंट से हटकर राजनीतिक फायदे पर केंद्रित है। कोर्ट की निगरानी में यह मामला भविष्य में डीजीपी नियुक्तियों और प्रशासनिक स्वतंत्रता पर बड़े सवाल खड़े कर सकता है। इस मामले से राज्य के कानून-व्यवस्था और राजनीतिक संतुलन पर भी असर पड़ने की संभावना है।

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