पश्चिम बंगाल में SIR (Special Identification Report) प्रक्रिया को लेकर TMC सांसदों की याचिका सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन रही। सांसदों ने इस प्रक्रिया में खामियों और अन्य संभावित मुद्दों को लेकर चिंता जताई थी। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि चुनाव आयोग हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से सलाह लेकर एक नोटिफिकेशन जारी करे। इस नोटिफिकेशन के तहत एक अपीलेट ट्रिब्यूनल बनाया जाएगा जिसमें एक पूर्व चीफ जस्टिस और अन्य जज शामिल होंगे। यह ट्रिब्यूनल उन अपीलों पर सुनवाई करेगा जिनकी अर्जी ज्यूडिशियल ऑफिसर्स द्वारा खारिज की जा रही है। कोर्ट ने यह भी कहा कि ज्यूडिशियल ऑफिसर्स जो अर्जी रिजेक्ट करेंगे, उसका कारण स्पष्ट रूप से बताएं।

ज्यूडिशियल ऑफिसर्स के काम का आंकड़ा और कोर्ट की नाराजगी
राज्य सरकार की तरफ से पेश वकील मेनका गुरुस्वामी ने कोर्ट को बताया कि ज्यूडिशियल ऑफिसर्स ने अब तक लगभग 7 लाख केस प्रोसेस किए हैं, जबकि कुल मामले 63 लाख हैं। सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि एडवांस पिटीशन से गलत संदेश जाता है कि सिस्टम पर भरोसा नहीं किया जा रहा। CJI सूर्यकांत ने सख्त लहजे में कहा कि पिटीशनर एप्लीकेशन फाइल करने की हिम्मत कैसे कर सकता है और ज्यूडिशियल ऑफिसर्स से सवाल पूछने की हिम्मत कैसे हुई। कोर्ट ने साफ चेतावनी दी कि एप्लीकेशन पर उचित कार्रवाई न करने पर अवमानना का नोटिस जारी किया जाएगा।
लॉजिस्टिक सपोर्ट और छुट्टियों की रद्दीकरण
सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि पश्चिम बंगाल हाईकोर्ट के CJ ने 10 मार्च को कम्युनिकेशन के जरिए बताया कि अब तक 10 लाख से ज्यादा ऑब्जेक्शन निपटा दिए गए हैं। पश्चिम बंगाल से 500 से ज्यादा और ओडिशा-झारखंड से 200 ज्यूडिशियल ऑफिसर तैनात किए गए हैं और दिन-रात काम कर रहे हैं। कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिए कि ज्यूडिशियल ऑफिसर्स की जिम्मेदारियों को पूरा करने में पूरी लॉजिस्टिक मदद दी जाए। इसके तहत आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं और उनकी छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि नई लॉगिन ID तुरंत बनाई जाए और अधिकारियों को सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख और भविष्य की कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि ज्यूडिशियल अधिकारियों को काम में कोई बाधा नहीं आए। कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग कोई भी ऐसा नियम लागू नहीं करेगा जिससे अधिकारियों को परेशानी हो। CJI सूर्यकांत ने कहा कि अब एक ऐसा स्तर आ गया है जहां दोनों पक्षों पर संदेह हो रहा है और हमें दोनों पक्षों की सच्चाई पर शक है। कोर्ट का रुख स्पष्ट है कि ट्रिब्यूनल के माध्यम से न्याय सुनिश्चित किया जाएगा और सभी आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था चुनाव आयोग और राज्य सरकार सुनिश्चित करेंगे।






