Sam Altman ने बच्चों की परवरिश को लेकर अपने विचारों में बदलाव किया है। पहले जहां वे तकनीक के शुरुआती उपयोग को लेकर ज्यादा चिंतित नहीं थे, वहीं अब वे मानते हैं कि छोटे बच्चों के लिए असली दुनिया का अनुभव ज्यादा जरूरी है। उनके अनुसार बच्चों को कम उम्र में डिजिटल डिवाइस से जोड़ने के बजाय उन्हें बाहरी गतिविधियों में शामिल करना चाहिए। उनका मानना है कि बचपन का मुख्य फोकस स्क्रीन नहीं बल्कि सीखने, खेलने और वास्तविक अनुभवों पर होना चाहिए। यह बदलाव उनके व्यक्तिगत जीवन में पिता बनने के बाद आया है।

आउटडोर गतिविधियों और वास्तविक अनुभवों पर जोर
सैम ऑल्टमैन का कहना है कि बच्चों को आईपैड या अन्य डिजिटल डिवाइस की बजाय बाहर जाकर खेलने, प्रकृति को देखने और परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिलना चाहिए। उनके अनुसार मिट्टी में खेलना, दौड़ना, कूदना और आसपास के वातावरण को महसूस करना बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहद जरूरी है। वे मानते हैं कि इस तरह की गतिविधियां बच्चों में रचनात्मकता, सामाजिक कौशल और संतुलित व्यक्तित्व विकसित करने में मदद करती हैं। डिजिटल दुनिया से पहले वास्तविक दुनिया का अनुभव बच्चों के लिए अधिक मूल्यवान है।
पॉडकास्ट में व्यक्त की गई चिंता और अनुभव
सैम ऑल्टमैन ने हाल ही में मोस्टली ह्यूमन पॉडकास्ट में अपने विचार साझा किए, जहां उन्होंने बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आजकल छोटे बच्चे टैबलेट और स्मार्टफोन पर ज्यादा समय बिताते हैं, जो उन्हें चिंता में डालता है। उन्होंने यह भी बताया कि जब वे बड़े बच्चों को देखते हैं जिनसे आईपैड या डिवाइस छीनना मुश्किल होता है, तो यह स्थिति उन्हें असहज महसूस कराती है। उनके अनुसार यह एक संकेत है कि तकनीक और बच्चों के बीच संतुलन की जरूरत है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
टेक्नोलॉजी और बचपन के बीच संतुलन की आवश्यकता
पहले जहां सैम ऑल्टमैन बच्चों को शुरुआती उम्र में डिवाइस इस्तेमाल करने देने के पक्ष में ज्यादा सहज थे, वहीं अब उनका दृष्टिकोण बदल गया है। वे मानते हैं कि बचपन में स्क्रीन का अत्यधिक उपयोग बच्चों के विकास को प्रभावित कर सकता है। उनका स्पष्ट मानना है कि बच्चों को पहले वास्तविक जीवन के अनुभवों से गुजरना चाहिए और उसके बाद ही तकनीक का सीमित और नियंत्रित उपयोग होना चाहिए। यह बदलाव इस बात को दर्शाता है कि आधुनिक तकनीक के युग में भी संतुलन और जागरूकता बेहद जरूरी है ताकि बच्चों का समग्र विकास सही दिशा में हो सके।







