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बिहार कोचिंग केस में सियासत तेज, तेजस्वी के पत्र पर रामकृपाल यादव का पलटवार

By Neha
On: Tuesday, June 16, 2026 11:16 AM
बिहार कोचिंग केस में सियासत तेज, तेजस्वी के पत्र पर रामकृपाल यादव का पलटवार
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बिहार में कोचिंग संस्थानों से जुड़े विवाद और एक छात्र की संदिग्ध मौत के मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मामले की सीबीआई जांच की मांग की है, जबकि बीजेपी ने इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने से बचने की सलाह दी है।

कोचिंग विवाद पर तेजस्वी यादव की बड़ी मांग

बिहार में कोचिंग संस्थानों के बीच कथित विवाद और प्रिंस यादव की नेपाल में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला लगातार चर्चा में है। इस बीच राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि मामले की गंभीरता और जनभावना को देखते हुए निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

बीजेपी ने दी राजनीतिक बयानबाजी से बचने की सलाह

तेजस्वी यादव की मांग पर बिहार सरकार में मंत्री रामकृपाल यादव ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार पूरे मामले पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को इस तरह के संवेदनशील मामलों पर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। उनके अनुसार सभी दलों की जिम्मेदारी है कि बिहार में शिक्षा का सकारात्मक माहौल बनाए रखें।

शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ती व्यावसायिकता पर चिंता

रामकृपाल यादव ने कहा कि शिक्षा का क्षेत्र धीरे-धीरे व्यवसाय में बदलता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग शिक्षा को सेवा नहीं बल्कि कमाई का माध्यम बना रहे हैं। उनके मुताबिक शिक्षा संस्थानों में असामाजिक तत्वों का प्रभाव बढ़ना चिंताजनक है और इससे छात्रों का भविष्य प्रभावित हो सकता है।

बिहार में बने शैक्षणिक माहौल की सराहना

बीजेपी नेता ने कहा कि पहले बिहार के छात्र बेहतर शिक्षा के लिए कोटा, पुणे और दिल्ली जैसे शहरों का रुख करते थे। लेकिन अब राज्य में भी कोचिंग और शिक्षा का बेहतर वातावरण विकसित हुआ है। उन्होंने शिक्षकों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि इससे गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों को बड़ा लाभ मिला है।

जाति और धर्म के नजरिए से शिक्षा को देखने पर आपत्ति

मामले में जातीय पहचान को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी रामकृपाल यादव ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि शिक्षा को जाति और धर्म के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। यदि शिक्षा जगत भी सामाजिक विभाजनों का शिकार हो गया तो इसका नुकसान पूरे समाज को उठाना पड़ेगा।

जांच और पारदर्शिता पर टिकी निगाहें

फिलहाल इस मामले में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर विपक्ष सीबीआई जांच की मांग कर रहा है तो दूसरी ओर सरकार और सत्तारूढ़ दल संयम बरतने की अपील कर रहे हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार आगे क्या कदम उठाती है और जांच किस दिशा में बढ़ती है।

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