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महिला आरक्षण बिल पर सियासी भूचाल विपक्ष और सरकार आमने सामने फिर टकराव

By Neha
On: Saturday, April 18, 2026 1:08 PM
महिला आरक्षण बिल पर सियासी भूचाल विपक्ष और सरकार आमने सामने फिर टकराव
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संसद में महिला आरक्षण बिल को लेकर पैदा हुए विवाद के बाद देश की राजनीति में भारी गर्माहट देखने को मिल रही है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि जो कुछ भी संसद में हुआ वह लोकतंत्र और संविधान की जीत है। उन्होंने दावा किया कि यह पूरा मामला महिला आरक्षण से ज्यादा परिसीमन की प्रक्रिया से जुड़ा हुआ था। उनके अनुसार सरकार का उद्देश्य विपक्ष को असमंजस में डालना था ताकि राजनीतिक लाभ उठाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ नहीं है बल्कि सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहा है।

सरकार पर साजिश का आरोप और सत्ता की राजनीति का दावा

प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह पूरा घटनाक्रम एक राजनीतिक साजिश का हिस्सा था। उन्होंने कहा कि सरकार को पहले से पता था कि बिल पारित नहीं होगा फिर भी इसे लाया गया ताकि राजनीतिक फायदा लिया जा सके। उनके अनुसार अगर बिल पास हो जाता तो सरकार खुद को महिलाओं की मसीहा के रूप में पेश करती और अगर नहीं होता तो विपक्ष पर आरोप लगाया जाता। उन्होंने कहा कि यह रणनीति महिलाओं को गुमराह करने की कोशिश है और असली मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास है।

महिला आरक्षण के पीछे परिसीमन और जातीय जनगणना का मुद्दा

प्रियंका गांधी ने कहा कि यह विवाद केवल महिला आरक्षण का नहीं बल्कि परिसीमन की प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार परिसीमन को ऐसे तरीके से लागू करना चाहती है जिसमें जातीय जनगणना के आंकड़ों की अनदेखी हो सके। उनके अनुसार इससे सत्ता पक्ष को मनमानी करने की पूरी आजादी मिल जाती। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष इस वजह से इस प्रस्ताव के समर्थन में नहीं था क्योंकि यह लोकतांत्रिक संतुलन को प्रभावित कर सकता था। उन्होंने कहा कि देश ने देख लिया है कि विपक्ष एकजुट होकर सरकार की रणनीति को चुनौती दे सकता है।

महिला मुद्दों पर सरकार और बीजेपी की छवि पर सवाल

कांग्रेस सांसद ने सरकार और बीजेपी पर महिलाओं के मुद्दों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार संसद में खुद को महिलाओं का समर्थक दिखाने की कोशिश कर रही है लेकिन जमीनी हकीकत अलग है। उन्होंने उन्नाव हाथरस और मणिपुर जैसी घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन मामलों में महिलाओं को न्याय नहीं मिला। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियां केवल राजनीतिक लाभ के लिए बनाई जाती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि देश की महिलाएं अब जागरूक हैं और उन्हें किसी तरह के राजनीतिक प्रचार से प्रभावित नहीं किया जा सकता।

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