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पालघर अवैध पटाखा फैक्ट्री विस्फोट मामला: विधान परिषद उपसभापति डॉ. नीलम गोऱ्हे ने किया घटनास्थल का दौरा; घायलों से मिलकर बँधाया ढाँढस

By Neha
On: Friday, April 24, 2026 8:20 AM
पालघर अवैध पटाखा फैक्ट्री विस्फोट मामला: विधान परिषद उपसभापति डॉ. नीलम गोऱ्हे ने किया घटनास्थल का दौरा; घायलों से मिलकर बँधाया ढाँढस
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पालघर, 23 अप्रैल: पालघर जिले के वाडा तालुका के कोनसाई गाँव में एक अवैध पटाखा फैक्ट्री में मंगलवार (21 अप्रैल) को भीषण विस्फोट हुआ। इस दुर्घटना में दो श्रमिकों की मृत्यु हो गई है और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इस घटना की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र विधान परिषद की उपसभापति और शिवसेना नेता डॉ. नीलम गोऱ्हे ने कोनसाई स्थित घटनास्थल का दौरा कर स्थिति का प्रत्यक्ष जायजा लिया। उन्होंने विस्फोट प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया और संबंधित अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली।

इसके पश्चात, उन्होंने वाडा के सरकारी अस्पताल जाकर घायल श्रमिकों का हाल-चाल जाना। डॉ. गोऱ्हे ने पीड़ितों के परिजनों से संवाद कर उन्हें सांत्वना दी और सहायता राशि भी प्रदान की। उन्होंने विश्वास दिलाया कि इस त्रासदी के पीड़ितों को सरकारी स्तर पर हर संभव मदद दिलाने के लिए वे निरंतर प्रयास करेंगी। साथ ही, इस संबंध में मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री को भी ज्ञापन सौंपा जाएगा।

दौरे के दौरान, उपसभापति डॉ. नीलम गोऱ्हे ने पुलिस, राजस्व और श्रम विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में हुई चर्चा का विवरण उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से साझा किया।

बैठक के मुख्य अंश और निर्देश:

सत्यापन और निगरानी: औद्योगिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य निदेशालय को अधिकृत कारखानों की सूची जारी करनी चाहिए। पुलिस पाटिल और ग्राम सेवकों को नियमित रूप से इन कारखानों का सत्यापन करना चाहिए। ग्राम सेवक की अनुपस्थिति में यह जिम्मेदारी पुलिस पाटिल और जहाँ पुलिस पाटिल नहीं हैं, वहाँ पुलिस निरीक्षकों को निभानी होगी।

कानून का सख्ती से पालन: जिन स्थानों पर 10 से अधिक श्रमिक कार्यरत हैं, वहाँ श्रम कानूनों को सख्ती से लागू किया जाना अनिवार्य है। राजस्व, ग्राम विकास, श्रम विभाग और औद्योगिक सुरक्षा निदेशालय को आपसी समन्वय से कार्य करना चाहिए।

सुरक्षा उपाय: प्रत्येक कारखाने में सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य करते हुए ‘फायर रक्षक’ की नियुक्ति के निर्देश दिए गए हैं।

औद्योगिक सुरक्षा प्रारूप: श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक ‘औद्योगिक सुरक्षा प्रारूप’ (Industrial Safety Plan) तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। ग्राम विकास विभाग को श्रमिकों के शोषण से संबंधित शिकायतों को दर्ज करने के निर्देश भी दिए जाएंगे।

डॉ. गोऱ्हे ने स्पष्ट किया कि इन सभी विषयों की रिपोर्ट मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को सौंपी जाएगी और शासन स्तर पर इसका पूर्ण अनुकरण (फॉलो-अप) किया जाएगा।

मृतक के परिवार को सहायता:

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के निर्देशानुसार, मृतक श्रमिक भावेश वावरे के परिजनों को आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। इसके साथ ही, डॉ. गोऱ्हे ने पुलिस उपाधीक्षक को निर्देश दिए कि इस मामले के आरोपी को जमानत न मिले और उसे कड़ी सजा हो, इसके लिए सक्षम सरकारी वकीलों की नियुक्ति की जाए।
इस अवसर पर भिवंडी ग्रामीण के विधायक शांताराम मोरे, अनुविभागीय पुलिस अधिकारी समीर मेहेर, पुलिस निरीक्षक दत्तात्रय किंद्रे, वाडा-विक्रमगढ़ प्रांताधिकारी डॉ. संदीप चव्हाण, तहसीलदार भाऊसाहेब अंधारे सहित शिवसेना के विभिन्न पदाधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।

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