16 मार्च 2026 को 11 राज्यसभा सीटों के लिए मतदान हुआ। बिहार में 5, ओडिशा में 4 और हरियाणा में 2 सीटों पर वोट डाले गए। बिहार और ओडिशा में विपक्षी दल अपने विधायकों को एकजुट रखने में असफल रहे। इसका फायदा NDA को मिला। बिहार में 5 सीटों पर कुल 6 उम्मीदवार थे, जिनमें 5 NDA और एक महागठबंधन के थे। NDA ने सभी 5 सीटों पर जीत दर्ज की। जीतने वालों में नीतीश कुमार, नितिन नबीन, रामनाथ ठाकुर, उपेन्द्र कुशवाहा और शिवेश राम शामिल हैं।

विपक्षी उम्मीदवार A. D. सिंह को लगा बड़ा झटका
बिहार में AIMIM के 5 और बहुजन समाज पार्टी के 1 विधायक के समर्थन के बाद विपक्षी उम्मीदवार A. D. सिंह की जीत की उम्मीद जताई जा रही थी। लेकिन आखिरी समय में महागठबंधन के 4 विधायक, जिनमें 3 कांग्रेस और 1 राजद विधायक थे, वोट डालने नहीं पहुंचे। पहली वरीयता में फैसला नहीं होने पर दूसरी वरीयता की गिनती हुई। इसके बाद भाजपा के शिवेश राम ने जीत हासिल कर ली। महागठबंधन ने भाजपा पर विधायकों को डराने-धमकाने और खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया।
ओडिशा में क्रॉस वोटिंग ने बदला चुनाव का रंग
ओडिशा में 4 सीटों के लिए 5 उम्मीदवार मैदान में थे। जीत के लिए 30 वोट जरूरी थे। भाजपा के मनमोहन सामल और सुजीत कुमार ने जीत दर्ज की। बीजू जनता दल के संतरूप मिश्रा भी जीतने में सफल रहे। लेकिन सबसे बड़ा उलटफेर तब हुआ जब भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप रे ने जीत हासिल की। बीजद और कांग्रेस के 8 और 3 विधायकों ने पार्टी लाइन के खिलाफ क्रॉस वोटिंग की। नवीन पटनायक ने भाजपा पर खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया और बागी विधायकों पर कार्रवाई की चेतावनी दी।
हरियाणा में एक-एक सीट और निर्विरोध जीत
हरियाणा में 2 सीटों के लिए मतदान हुआ। वोटिंग की गोपनीयता भंग होने की शिकायतों के कारण मतगणना 5 घंटे तक रुकी। अंत में भाजपा के संजय भाटिया और कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध ने एक-एक सीट जीत ली। निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल हार गए। संजय भाटिया को 31, कर्मवीर बौद्ध को 28 और सतीश नांदल को 27 वोट मिले। इसके अलावा 26 सीटों पर केवल एक ही उम्मीदवार होने के कारण निर्विरोध जीत हुई। इनमें शरद पवार, अभिषेक मनु सिंघवी, रामदास अठावले और तिरुचि शिवा जैसे नेता शामिल हैं।







