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रिविलगंज में बन रही अहिल्या वाटिका में माता अहिल्या और राम की प्रतिमाओं का अंतिम चरण

By Neha
On: Tuesday, March 10, 2026 3:48 PM
रिविलगंज में बन रही अहिल्या वाटिका में माता अहिल्या और राम की प्रतिमाओं का अंतिम चरण
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सारण जिले के रिविलगंज स्थित गौतम ऋषि मंदिर परिसर इन दिनों आध्यात्मिक ऊर्जा और धार्मिक उत्साह से भरा हुआ है। मंदिर प्रांगण में निर्माणाधीन अहिल्या वाटिका का अंतिम रूप देने का कार्य तेजी से चल रहा है। इस वाटिका में माता अहिल्या, महर्षि विश्वामित्र, प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण की आकर्षक आदमकद प्रतिमाओं का निर्माण अंतिम चरण में पहुंच चुका है। कलाकार इन प्रतिमाओं को जीवंत और मनमोहक रूप देने में लगे हुए हैं। पूरा परिसर अब आध्यात्मिक आभा से ओतप्रोत नजर आ रहा है।

शिल्पकारों की अद्भुत कला

वाटिका में स्थापित होने वाली सभी प्रतिमाओं का निर्माण सारण जिले के दाउदपुर बाजार निवासी शिल्पकार कन्हैया राम और विकास कुमार द्वारा किया जा रहा है। इन दोनों ने बारीकी और कलात्मक दृष्टि से प्रतिमाओं को आकार दिया है। उनके प्रयास से प्रतिमाएं न केवल देखने में आकर्षक हैं बल्कि भावपूर्ण भी प्रतीत हो रही हैं। श्रद्धालु इन प्रतिमाओं को देखकर आध्यात्मिक अनुभव का आनंद ले सकेंगे। शिल्पकारों का यह काम क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बन गया है।

राम नवमी पर विधिवत स्थापना

मंदिर के महंत प्रभुनाथ दास जी महाराज और समाजसेवी विनोद कुमार श्रीवास्तव के अनुसार सभी प्रतिमाओं की विधिवत स्थापना वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के साथ राम नवमी के पावन अवसर पर की जाएगी। इस अवसर पर मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान और कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अहिल्या वाटिका को आकर्षक बनाने के लिए फूलदार और पत्तेदार पौधों के साथ फव्वारे, सुंदर पाथवे और प्रेरक स्लोगन भी लगाए जा रहे हैं। इससे आने वाले श्रद्धालुओं को धार्मिक और सांस्कृतिक जानकारी भी मिलेगी।

अहिल्या वाटिका का सामाजिक और धार्मिक महत्व

महर्षि गौतम-अहिल्या उद्धार स्थल के रूप में प्रसिद्ध इस मंदिर परिसर में अहिल्या वाटिका का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को माता अहिल्या के उद्धार स्थल और धार्मिक प्रसंगों की जानकारी देना है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शिलान्यास 22 जनवरी 2024 को प्रसिद्ध विद्वान आचार्य श्याम नंदन शास्त्री द्वारा किया गया था। लगभग एक वर्ष के निर्माण कार्य के बाद यह वाटिका क्षेत्र की धार्मिक पहचान को और मजबूत करेगी। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह स्थल श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए महत्वपूर्ण आध्यात्मिक केंद्र बनकर उभरेगा।

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