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महाराष्ट्र सरकार का बड़ा दावा हाथीपांव उन्मूलन में IDA थेरपी से मिल रही सफलता

By Neha
On: Friday, March 27, 2026 2:35 PM
महाराष्ट्र सरकार का बड़ा दावा हाथीपांव उन्मूलन में IDA थेरपी से मिल रही सफलता
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मुंबई, 26 मार्च: महाराष्ट्र सहित पूरे देश से हाथीपांव (लिम्फैटिक फाइलेरियासिस) के समूचे खात्मे के लिए ‘ट्रिपल ड्रग थेरपी’ (IDA) अभियान को तेज कर दिया गया है। इस विशेष मुहिम के तहत इवरमेक्टिन, डीईसी (डायथाइलकार्बामाज़िन) और एल्बेंडाजोल नामक तीन दवाओं के संयुक्त उपचार पर जोर दिया जा रहा है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2027 तक भारत से फाइलेरियासिस के पूर्ण उन्मूलन का लक्ष्य रखा है, जिसमें महाराष्ट्र सरकार सक्रिय भागीदारी निभा रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा की।

विदर्भ और आदिवासी क्षेत्रों को प्राथमिकता

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि फाइलेरियासिस जैसी उपेक्षित बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण पाने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने ठोस पहल की है। उन्होंने कहा:

 “महाराष्ट्र ने 2017 में ही केंद्र सरकार से विशेष रूप से विदर्भ के जिलों में इस उपचार को प्राथमिकता देने का अनुरोध किया था। इसके सकारात्मक परिणाम अब सामने आ रहे हैं, जिससे विदर्भ के आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों की पीड़ा कम करने में मदद मिल रही है। प्रधानमंत्री के ‘फाइलेरिया मुक्त भारत’ के सपने को पूरा करने में महाराष्ट्र अपना पूर्ण योगदान दे रहा है।”

मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (MDA) और IDA का प्रभाव

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा देश के 12 राज्यों में बड़े स्तर पर ‘मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन’ (MDA) अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें महाराष्ट्र एक प्रमुख राज्य है।

  • निवारक उपचार: इस अभियान के तहत पात्र नागरिकों को प्रतिवर्ष सुरक्षात्मक दवाएं दी जाती हैं ताकि संक्रमण की कड़ी को तोड़ा जा सके।
  • तकनीकी प्रगति: राज्य के चुनिंदा जिलों में पारंपरिक दो दवाओं के स्थान पर अब ‘ट्रिपल ड्रग थेरपी’ (IDA) का उपयोग किया जा रहा है, जो कम समय में बीमारी को नियंत्रित करने में अधिक सक्षम है।

महाराष्ट्र के प्रभावित क्षेत्र और लक्ष्य

विदर्भ क्षेत्र में हाथीपांव का प्रभाव अधिक होने के कारण गडचिरोली, भंडारा और चंद्रपुर जैसे जिलों में विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं।

  • लाभार्थी लक्ष्य: राज्य में लगभग 55 लाख नागरिकों को इस उपचार के दायरे में लाने का लक्ष्य है।
  • विशेषज्ञों की राय: विशेषज्ञों के अनुसार, IDA उपचार ‘माइक्रोफिलेरिया’ (परजीवी) को नष्ट करने में अत्यंत प्रभावी है, जिससे रोग का प्रसार तुरंत रुक जाता है।

वर्तमान स्थिति और सांख्यिकी (फरवरी 2026 की रिपोर्ट)

महाराष्ट्र के 18 जिलों (नागपूर, चंद्रपुर, भंडारा, वर्धा, गडचिरोली, अमरावती, अकोला, लातूर, धाराशिव, सोलापूर, जलगांव, सिंधुदुर्ग, नांदेड, ठाणे, पालघर, नंदुरबार, सोलापुर और यवतमाल) में इस बीमारी का प्रभाव है।

प्रमुख आंकड़े:

  • नागपुर का प्रभाव: फरवरी 2026 की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र के कुल हाथीपांव मामलों में से 75% मामले अकेले नागपुर विभाग में हैं।
  • सर्वाधिक प्रभावित 5 जिले: भंडारा, चंद्रपुर, नागपुर, गडचिरोली और गोंदिया।
  • सफलता का प्रमाण: नागपुर ग्रामीण क्षेत्र में IDA नीति की सफलता के कारण सूक्ष्मजीव प्रसार दर (MF Rate), जो 2014 में 4.91% थी, वह 2024 तक घटकर 1% से भी कम हो गई है।

मुख्यमंत्री की अपील

मुख्यमंत्री ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और स्वास्थ्य कर्मियों की देखरेख में इन दवाओं का सेवन अवश्य करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि जन-भागीदारी के बिना इस गंभीर बीमारी का उन्मूलन संभव नहीं है।

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