उत्तर प्रदेश के कुशीनगर से गिरफ्तार कर दिल्ली लाए गए आईएसआईएस आतंकी रिजवान अहमद से स्पेशल सेल लगातार पूछताछ कर रही है। पटियाला हाउस कोर्ट से रिमांड मिलने के बाद एजेंसियों ने उससे कई महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल की हैं। पूछताछ के दौरान सामने आया कि रिजवान और उसके नेटवर्क के अन्य आतंकी देश के कई राज्यों में मौजूद धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने की योजना पर काम कर रहे थे। उसकी गतिविधियां लंबे समय से खुफिया एजेंसियों की निगरानी में थीं और अब गिरफ्तारी के बाद जांच को नई दिशा मिली है।

युवाओं को जोड़ने और ब्रेनवॉश करने का नेटवर्क
जांच में यह भी सामने आया है कि रिजवान सोशल मीडिया और इंटरनेट के माध्यम से करीब 200 युवाओं के संपर्क में था। वह इन युवाओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें अपने संगठन से जोड़ने की कोशिश कर रहा था। खासतौर पर वह मुस्लिम युवाओं को टारगेट कर उन्हें आतंकी गतिविधियों के लिए प्रेरित करता था। पूछताछ में यह भी पता चला कि उसने सीरिया में बैठे आतंकियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और ऑनलाइन माध्यम से बम बनाने की तकनीक सीखी थी। टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए वह कई लोगों से संपर्क में था, जिनमें से कुछ चैट्स उसने डिलीट भी कर दी हैं।
आतंकी गतिविधियों और पुराने रिकॉर्ड का खुलासा
रिजवान अहमद 2015 में आईएसआईएस से जुड़ा था और संगठन के लिए काम करने लगा था। उसे युवाओं की भर्ती और संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी दी गई थी। इससे पहले भी उसकी गतिविधियों के चलते वह केंद्रीय एजेंसियों के रडार पर था। वर्ष 2017 से 2023 तक वह मुंबई की आर्थर रोड सेंट्रल जेल में बंद रहा, जहां उस पर आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगे थे। जमानत पर बाहर आने के बाद उसने फिर से संगठन से संपर्क साधा और अपनी गतिविधियां दोबारा शुरू कर दीं। उसके मोबाइल, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त कर लिए गए हैं और उनका फोरेंसिक विश्लेषण जारी है।
जांच एजेंसियों की कार्रवाई और आगे की रणनीति
स्पेशल सेल की काउंटर इंटेलिजेंस टीम, जिसका नेतृत्व डीसीपी मनीषी चंद्रा कर रहे हैं, इस मामले की गहराई से जांच कर रही है। रिजवान को यूपी एटीएस और आईबी की सूचना के आधार पर गिरफ्तार किया गया था। अब पुलिस उसके कॉल डिटेल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया गतिविधियों और पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की जांच कर रही है। वह जांच में सहयोग नहीं कर रहा है, जिससे पूछताछ और भी चुनौतीपूर्ण हो गई है। सोमवार को उसे कोर्ट में पेश कर आगे की रिमांड ली जाएगी ताकि उसके नेटवर्क, फंडिंग और अन्य सहयोगियों के बारे में और जानकारी जुटाई जा सके।








