मुंबई | विशेष संवाददाता: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की एक संवेदनशील पहल ने राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक मील का पत्थर स्थापित किया है। बच्चों में बढ़ते कैंसर के मामलों को देखते हुए और उनके उपचार में आने वाली आर्थिक बाधाओं को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री सहायता कक्ष (CMRO), बीपीसीएल (BPCL) फाउंडेशन और टाटा मेमोरियल सेंटर के बीच एक ऐतिहासिक त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

पारदर्शिता और त्वरित उपचार पर जोर
इस समझौते का मुख्य उद्देश्य कैंसर पीड़ित बच्चों को बिना किसी देरी के उच्च गुणवत्ता वाला इलाज उपलब्ध कराना है। इस परियोजना को अत्यंत पारदर्शी और प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए तीनों संस्थाओं ने अपनी जिम्मेदारियों को स्पष्ट किया है। इस समन्वय से अब इलाज की फाइलों और फंड की मंजूरी की प्रक्रिया में तेजी आएगी।
“जल्द निदान और किफायती उपचार ही एकमात्र समाधान” – मुख्यमंत्री फडणवीस
समझौते पर खुशी जताते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “बच्चों का संरक्षण और उनके स्वास्थ्य की रक्षा करना राज्य का प्राथमिक कर्तव्य है। कैंसर के खिलाफ इस युद्ध को केवल अस्पताल नहीं जीत सकते; इसके लिए जल्द निदान (Early Diagnosis), सस्ता इलाज और व्यापक जन-जागरूकता अनिवार्य है। सरकार और समाज को एक साथ आना ही होगा।”
मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि टाटा मेमोरियल सेंटर ने बाल रोगियों के सर्जरी खर्च के लिए मुख्यमंत्री सहायता निधि से सहयोग माँगा था, जिसे गंभीरता से लेते हुए बीपीसीएल फाउंडेशन ने अपने सीएसआर (CSR) फंड के माध्यम से इसमें बड़ी भागीदारी निभाने का निर्णय लिया है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में ‘कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी’ (CSR) की नई मिसाल
मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में बीपीसीएल फाउंडेशन के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि जब बड़े कॉर्पोरेट घराने स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ते हैं, तो सामान्य जनता तक गुणवत्तापूर्ण इलाज पहुँचाना आसान हो जाता है। यह करार महाराष्ट्र की स्वास्थ्य सेवाओं के बढ़ते स्तर का प्रतीक है, जो कैंसर से लड़ रहे मासूम बच्चों के जीवन में एक बड़ा सकारात्मक बदलाव लाएगा।
जरूरतमंदों के लिए ‘सारथी’ बना मुख्यमंत्री सहायता कक्ष
मुख्यमंत्री सहायता कक्ष के प्रमुख रामेश्वर नाईक, जिन्होंने इस पूरे समझौते को अमली जामा पहनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, उन्होंने अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा:
“बच्चे हमारे देश का भविष्य हैं। उन्हें कैंसर जैसे जानलेवा रोग से लड़ने के लिए अकेला नहीं छोड़ा जा सकता। हमारा मुख्य लक्ष्य गरीब और जरूरतमंद मरीजों को बिना किसी तकनीकी देरी के तत्काल वित्तीय सहायता पहुँचाना और पूरी प्रणाली को मरीज-हितैषी बनाना है।”
खबरदीप विश्लेषण: यह समझौता केवल एक सरकारी कागजी कार्यवाही नहीं है, बल्कि उस इच्छाशक्ति का प्रमाण है जहाँ सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) और विशेषज्ञ चिकित्सा संस्थान एक साथ मिलकर ‘मिशन मोड’ में काम कर रहे हैं। आने वाले समय में यह मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।








