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दिल्ली में भव्य आयोजन, एक चरण पर खड़ी अनोखी प्रतिमा करेगी सबको चकित

By Neha
On: Wednesday, March 25, 2026 2:28 PM
दिल्ली में भव्य आयोजन, एक चरण पर खड़ी अनोखी प्रतिमा करेगी सबको चकित
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दिल्ली स्थित Swaminarayan Akshardham एक बार फिर ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने जा रहा है। गुरुवार को यहां तपोमूर्ति श्रीनीलकंठवर्णी की 108 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी। यह आयोजन Mahant Swami Maharaj के सान्निध्य में संपन्न होगा। पंचधातु से बनी यह विशाल प्रतिमा अपनी तरह की अनूठी है, क्योंकि इसमें भगवान को ‘एक चरण’ पर तपस्या करते हुए दर्शाया गया है। इस ऐतिहासिक अवसर को लेकर देश और विदेश से श्रद्धालु और संत बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं।

वैश्विक स्तर पर जुटे संत और भव्य आयोजन

इस महोत्सव की तैयारियां कई दिनों से जोरों पर चल रही हैं। यूरोप, अमेरिका, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया समेत दुनियाभर से 300 से अधिक संत और महंत इस कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचे हैं। महंतस्वामी महाराज 19 मार्च को दिल्ली पहुंचे थे, जिसके बाद 21 मार्च को उनका भव्य स्वागत किया गया। इसके बाद पंचकुला और कुरुक्षेत्र में नए मंदिरों की मूर्ति प्रतिष्ठा और फूलों की होली जैसे धार्मिक आयोजनों ने माहौल को और भी आध्यात्मिक बना दिया। साथ ही पेरिस में बनने वाले मंदिर की मूर्ति का भी पूजन किया गया, जो इस आयोजन की वैश्विक महत्ता को दर्शाता है।

नीलकंठवर्णी की तपस्या और प्रतिमा की विशेषता

भगवान स्वामीनारायण ने मात्र 11 वर्ष की आयु में घर त्यागकर सात वर्षों तक पूरे भारत में कठिन यात्रा की थी। इस दौरान उन्होंने हिमालय से लेकर रामेश्वरम और द्वारका तक हजारों किलोमीटर की पदयात्रा की और ‘नीलकंठवर्णी’ नाम धारण किया। उसी तपस्या को इस 108 फीट ऊंची प्रतिमा में दर्शाया गया है। पंचधातु से निर्मित इस प्रतिमा को बनाने में करीब एक वर्ष का समय लगा और इसमें लगभग 50 कारीगरों और कई स्वयंसेवकों का योगदान रहा। यह प्रतिमा तप, त्याग और मानव सेवा जैसे मूल्यों का संदेश देती है।

विश्व शांति के संदेश के साथ महोत्सव का आगाज

इस भव्य महोत्सव की शुरुआत श्रीनीलकंठवर्णी विश्व शांति महायज्ञ के साथ की गई। अक्षरधाम परिसर में वैदिक विधि से पूजन संपन्न हुआ और महंतस्वामी महाराज ने विश्व शांति और एकता के लिए प्रार्थना की। उन्होंने सफेद कबूतर उड़ाकर शांति का संदेश दिया। गुरुवार सुबह 6 बजे से मुख्य प्राण-प्रतिष्ठा विधि शुरू होगी और इसके बाद प्रतिमा का विधिवत लोकार्पण किया जाएगा। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि वैश्विक स्तर पर शांति, सद्भाव और एकता का संदेश भी देगा।

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