देश में एलपीजी की कमी और संभावित लॉकडाउन को लेकर फैली अफवाहों के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। सरकार ने साफ कहा है कि देश में किसी भी तरह का लॉकडाउन लगाने की कोई योजना नहीं है और न ही जनता की आवाजाही या आर्थिक गतिविधियों पर कोई पाबंदी लगाने का विचार किया जा रहा है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इन खबरों को पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए कहा कि ऐसी अफवाहों से लोगों में अनावश्यक डर फैलाया जा रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें और किसी भी तरह की अफवाहों से दूर रहें।

कोविड जैसा लॉकडाउन नहीं होगा
वित्त मंत्री ने अपने बयान में स्पष्ट रूप से कहा कि देश में कोविड जैसे हालात नहीं हैं और न ही वैसा कोई लॉकडाउन लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कुछ नेताओं द्वारा इस तरह के बयान देना चिंताजनक है क्योंकि इससे जनता के बीच भ्रम और डर पैदा होता है। निर्मला सीतारमण ने दोहराया कि सरकार पूरी तरह स्थिति पर नजर बनाए हुए है और किसी भी प्रकार के प्रतिबंध की आवश्यकता नहीं है। इससे पहले केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी ऐसी अफवाहों को खारिज करते हुए कहा था कि लॉकडाउन की चर्चा पूरी तरह गलत और भ्रामक है।
सरकार ने लोगों से की शांति बनाए रखने की अपील
हरदीप सिंह पुरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि भारत में लॉकडाउन की अफवाहें पूरी तरह झूठी हैं और सरकार इस तरह के किसी प्रस्ताव पर विचार नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि इस तरह की अफवाहें समाज में दहशत पैदा करती हैं और लोगों को गलत दिशा में ले जाती हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे शांत रहें और जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करें। सरकार का मानना है कि इस तरह की गलत सूचनाएं न केवल सामाजिक माहौल को प्रभावित करती हैं बल्कि आर्थिक गतिविधियों पर भी नकारात्मक असर डाल सकती हैं।
वैश्विक संकट का असर कम करने की कोशिश
सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए एक्साइज ड्यूटी में बड़ी कटौती की है। अब पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है जबकि डीजल पर इसे पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। इसके अलावा डीजल के निर्यात पर 21.5 रुपये प्रति लीटर का विंडफॉल टैक्स तय किया गया है। यह फैसला वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच लिया गया है जो पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और हॉर्मुज स्ट्रेट पर नाकेबंदी के कारण उत्पन्न हुआ है। इस समुद्री मार्ग से दुनिया के कच्चे तेल और गैस की बड़ी मात्रा गुजरती है और इसमें किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर भारत जैसे देशों पर पड़ता है। सरकार का उद्देश्य इस संकट के बीच आम उपभोक्ताओं को राहत देना और बाजार में स्थिरता बनाए रखना है।







