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संसद में विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप, गोगोई ने उठाए गंभीर सवाल

By Neha
On: Tuesday, March 10, 2026 6:05 PM
संसद में विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप, गोगोई ने उठाए गंभीर सवाल
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कांग्रेस नेता और लोकसभा सांसद गौरव गोगोई ने संसद की कार्यवाही को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब एमएम नरवणे की किताब पर चर्चा चल रही थी, उस दिन चेयर पूरी तरह निष्पक्ष नहीं रही। गोगोई ने कहा कि विपक्ष के नेताओं को अपनी बात रखने का पूरा मौका नहीं दिया जा रहा। उन्होंने विशेषकर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ हुई घटनाओं का जिक्र किया और कहा कि उन्हें कई बार टोका गया। राहुल गांधी के अनुसार अंतरराष्ट्रीय मामले में जब किसी मंत्री का नाम सामने आया, तो इसकी जांच और पुष्टि के लिए उन्हें बोलने का पूरा अवसर मिलना चाहिए था।

बोलने की अनुमति न मिलने का आरोप

गोगोई ने बताया कि राहुल गांधी लगातार अपनी बात रखने की अनुमति मांगते रहे, लेकिन स्पीकर ने किसी अन्य सदस्य को बोलने का मौका दे दिया। कुछ दिन बाद जब शशि थरूर बोल रहे थे, उनका माइक भी बंद कर दिया गया। गोगोई ने इसे संसदीय परंपराओं के खिलाफ बताया और कहा कि यह विपक्ष की आवाज दबाने जैसा संदेश देता है। उन्होंने पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के बयान का हवाला देते हुए कहा कि लोकतंत्र में विरोध होना चाहिए, लेकिन विरोधियों को शत्रु मानना गलत है। उनका मानना है कि आज विपक्ष के नेताओं को बोलने का अवसर न देना लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है।

नेहरू और ट्रेड डील पर उठाए सवाल

गोगोई ने भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहलाल नेहरू का जिक्र करते हुए कहा कि स्पीकर देश की स्वतंत्रता का प्रतीक होते हैं, लेकिन आज बोलने की आजादी ही सीमित हो गई है। इसके अलावा उन्होंने अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील पर सवाल उठाया और पूछा कि इस पर किस दबाव में हस्ताक्षर हुए। उन्होंने पीएम मोदी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि नेतृत्व केवल अपनी बात सुनता है और अन्य की बात को नजरअंदाज करता है। उन्होंने मिडिल ईस्ट की स्थिति और विदेश नीति पर सवाल उठाया और बताया कि सदन में चर्चा को नजरअंदाज किया गया।

ओम बिरला पर आरोप और संसदीय कार्यमंत्री का पलटवार

गोगोई ने ओम बिरला के बयान पर भी हमला किया और कहा कि महिला सांसदों के मुद्दे पर उन्हें धमकी दी गई कि वे सदन में न आएं। गौरव गोगोई ने यह भी कहा कि लोकसभा में बोलने के लिए किसी से परमिशन की जरूरत नहीं है। इसके जवाब में संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने पलटवार करते हुए कहा कि गोगोई ने सदन में कई बार नियमों का पालन नहीं देखा। उन्होंने नेहरू और राजीव गांधी के दृष्टिकोण का हवाला देते हुए कहा कि संसदीय सम्मान का मामला गंभीर है और किसी भी टिप्पणी का असर केवल बोलने वाले पर पड़ता है।

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