असम में अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल तेजी से गर्म होता जा रहा है। इसी बीच मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बाली में आयोजित एक विशाल रैली को संबोधित करते हुए बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि यदि राज्य में भारतीय जनता पार्टी फिर से सत्ता में आती है तो 5 लाख बीघा सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाएगा। यह बयान चुनावी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है जहां सरकार अपनी उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं को जनता के सामने रख रही है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पिछले पांच वर्षों में सरकार ने करीब 1.5 लाख बीघा भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया है और आने वाले समय में इस अभियान को और तेज किया जाएगा। इस घोषणा ने चुनावी चर्चा को और अधिक तेज कर दिया है और विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है।

अतिक्रमणकारियों पर सख्ती और ‘मिया’ समुदाय का जिक्र
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने अपने संबोधन में अतिक्रमणकारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की बात दोहराई। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में सरकार ने अतिक्रमणकारियों को सबक सिखाया है और उनके प्रभाव को काफी हद तक कम किया गया है। उन्होंने अपने भाषण में ‘मिया’ शब्द का उल्लेख किया जो बंगाली भाषी मुस्लिम प्रवासियों के लिए उपयोग किया जाता है और जिसे कई बार विवादास्पद और अपमानजनक माना जाता है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य राज्य के स्वदेशी समुदायों के अधिकारों की रक्षा करना है और किसी भी प्रकार के अवैध अतिक्रमण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने इस मुद्दे को ‘जाती माटी और भेटी’ की सुरक्षा से जोड़ते हुए इसे असम की पहचान और अस्तित्व का सवाल बताया। यह बयान राज्य की राजनीति में एक संवेदनशील मुद्दे को फिर से केंद्र में ले आया है।
कांग्रेस पर हमला और ‘ग्रेटर असम’ विवाद
अपने भाषण के दौरान मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने असम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई के ‘ग्रेटर असम’ के विचार की आलोचना की और इसे राज्य के हितों के खिलाफ बताया। हिमंत बिस्वा सरमा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और गोगोई का रुख ऐसा है जो अवैध प्रवासियों और स्थानीय लोगों को एक साथ रहने के विचार को बढ़ावा देता है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस हमेशा से ‘मिया’ समुदाय को अधिक प्राथमिकता देती रही है जबकि स्वदेशी असमिया लोगों के हितों की अनदेखी की गई है। यह बयान चुनावी नैरेटिव को और अधिक ध्रुवीकृत करने वाला माना जा रहा है और इससे राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। विभिन्न दल अब इस मुद्दे पर अपनी-अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं।
चुनावी तैयारी और मतदान की तारीख
असम विधानसभा की कुल 126 सीटों के लिए मतदान 9 अप्रैल को होगा और मतगणना 4 मई को की जाएगी। मुख्यमंत्री ने अपनी रैली के दौरान असम गण परिषद के उम्मीदवार धर्मेश्वर रॉय और दीपक कुमार दास के समर्थन में भी प्रचार किया। उन्होंने कहा कि भाजपा और असम गण परिषद का गठबंधन मजबूत और अटूट है और दोनों दल मिलकर राज्य के विकास के लिए काम कर रहे हैं। वहीं बारपेटा सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार मणानंद सरकार का नामांकन रद्द होने के बाद वहां का चुनावी मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है। जैसे जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है वैसे वैसे सभी राजनीतिक दल अपने प्रचार अभियान को तेज कर रहे हैं और मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश में जुटे हैं। असम का यह चुनाव कई मायनों में निर्णायक माना जा रहा है और इसके परिणाम राज्य की राजनीतिक दिशा तय करेंगे।








