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पश्चिम एशिया युद्ध से भारत में विमान ईंधन की कीमतों में जल्द बढ़ोतरी होने की संभावना

By Neha
On: Sunday, March 22, 2026 8:28 AM
पश्चिम एशिया युद्ध से भारत में विमान ईंधन की कीमतों में जल्द बढ़ोतरी होने की संभावना
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पश्चिम एशिया में US-Israel-Iran युद्ध और भू-राजनीतिक अस्थिरता का असर अब भारत की एयरलाइंस कंपनियों पर भी दिखने लगा है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि 1 अप्रैल से एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में बढ़ोतरी संभव है। हालांकि, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों पर इसका तत्काल असर नहीं डाला जाएगा और इस दिशा में कई प्रयास जारी हैं। एयरलाइंस कंपनियों को वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन सरकार का ध्यान सुरक्षित और नियमित परिचालन सुनिश्चित करने पर केंद्रित है।

ATF कीमतों में संभावित बढ़ोतरी और सरकार की प्रतिक्रिया

केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने बताया कि ATF की कीमतें हर महीने की पहली तारीख को तय की जाती हैं और वर्तमान वैश्विक हालात के कारण संभावित असर 1 अप्रैल से दिख सकता है। उन्होंने स्वीकार किया कि ईरान युद्ध के चलते कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हुई है और खाड़ी देशों के ऊपर से उड़ानों पर रोक लगने से बीमा महंगा हो गया है। इसका सीधा असर ऑपरेशनल खर्चों और ATF की कीमतों में वृद्धि के रूप में दिखाई देगा। लेकिन मंत्रालय का प्रयास है कि यात्रियों को तुरंत महंगे टिकट का सामना न करना पड़े।

एयरलाइंस का फ्यूल सरचार्ज और लागत का बोझ

बढ़ी हुई लागत का बोझ कम करने के लिए घरेलू एयरलाइंस ने पहले ही फ्यूल सरचार्ज लागू कर दिया है। एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने घरेलू टिकटों पर 399 रुपये का सरचार्ज लगाया है। अंतरराष्ट्रीय रूटों पर यह 10 डॉलर से 200 डॉलर (लगभग 16,000 रुपये) तक पहुंच सकता है। वहीं, इंडिगो ने दूरी के आधार पर 425 रुपये से 2,300 रुपये तक का सरचार्ज लगाया है और बजट एयरलाइन अकासा एयर ने उड़ान की अवधि के आधार पर 199 रुपये से 1,300 रुपये तक फ्यूल सरचार्ज लागू किया है। इसका सीधा असर यात्रियों की जेब और हवाई यात्रा लागत पर पड़ रहा है।

सरकार की कोशिशें और भविष्य का परिदृश्य

मंत्री नायडू ने जोर देकर कहा कि मौजूदा हालात में तेल और ATF की कीमतों में बढ़ोतरी लगभग तय है। सरकार हर संभव कदम उठा रही है ताकि टिकट की कीमतों में भारी उछाल न आए। यात्रियों के हित को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय एयरलाइंस कंपनियों के साथ लगातार संवाद और समन्वय कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि युद्ध जारी रहता है तो वैश्विक ईंधन कीमतों में और वृद्धि संभव है, जिससे भारत में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की लागत और अधिक बढ़ सकती है।

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