मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ नगर पालिका परिषद को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद और भ्रष्टाचार के आरोपों पर आखिरकार राज्य सरकार ने सख्त कार्रवाई की है। आवास एवं शहरी विकास विभाग, भोपाल के आदेश पर नगर परिषद के अध्यक्ष अब्दुल गफ्फार को उनके पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। यह कदम उन शिकायतों के आधार पर उठाया गया है जो पार्षदों द्वारा दर्ज कराई गई थीं और जिनकी जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित की गई थी। जांच रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन की पुष्टि हुई, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई।

जांच रिपोर्ट में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा
जांच समिति की रिपोर्ट में यह सामने आया कि नगर परिषद अध्यक्ष अब्दुल गफ्फार पर लाखों रुपये के वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सही पाए गए हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि उन्होंने अपने कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही बरती और कई महत्वपूर्ण निर्णय निर्धारित नियमों के अनुसार नहीं लिए। इन निष्कर्षों के आधार पर सरकार ने उन्हें पद से हटाने का निर्णय लिया। इस पूरे मामले ने नगर पालिका के कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था की समीक्षा की मांग को भी तेज कर दिया है।
भाजपा पार्षदों के विरोध और राजनीतिक दबाव
इस मामले में भारतीय जनता पार्टी से जुड़े पार्षदों ने लंबे समय तक नगर परिषद में कथित अनियमितताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था। उनका आरोप था कि परिषद के संचालन में पारदर्शिता की कमी है और कई निर्णय नियमों के विपरीत लिए जा रहे हैं। जांच के लिए गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट 19 दिसंबर 2025 को सरकार को सौंपी थी, जिसमें अध्यक्ष के कार्यों और निर्णय प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए गए थे। इस रिपोर्ट के बाद ही सरकार ने आगे की कार्रवाई की दिशा में कदम बढ़ाया।
हाईकोर्ट में भी नहीं मिली राहत और पद से हटाने का आदेश
जांच रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने अब्दुल गफ्फार को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। लेकिन उन्होंने इसका जवाब देने के बजाय मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का रुख किया। हालांकि वहां से भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली। इसके बाद सरकार ने मध्य प्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 51 के तहत उन्हें दोषी मानते हुए पद से हटाने का आदेश जारी कर दिया। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि उन्होंने अपने कर्तव्यों का सही ढंग से निर्वहन नहीं किया। साथ ही सरकार ने यह निर्देश भी दिया है कि सरकारी नुकसान की भरपाई उनसे सीधे की जाए। इस कार्रवाई के बाद टिकमगढ़ की स्थानीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है और नगर परिषद के भविष्य को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।








