पालघर | 6 अगस्त 2026: मदद करने की भावना उम्र की मोहताज नहीं होती, यह अच्छे संस्कारों से आती है। पालघर जिले के जव्हार के आदिवासी बच्चों ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है। शासकीय आश्रम स्कूल, दाभेरी के बच्चों ने अपनी पॉकेट मनी यानी खाने-पीने के लिए मिलने वाले पैसों में से थोड़ा-थोड़ा बचाकर असम के बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए 17,060 रुपये जमा किए।
बच्चों ने यह पूरी राशि जव्हार की परियोजना अधिकारी एवं सहायक जिलाधिकारी डॉ. अपूर्वा बासुर को अपने हाथों से सौंपकर मानवीय संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल पेश की।
अधिकारी की प्रेरणा से बच्चों में जगा सेवा का भाव
इस पहल की शुरुआत सहायक जिलाधिकारी डॉ. अपूर्वा बासुर की प्रेरणा से हुई। उनके मार्गदर्शन से बच्चों ने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए अपने छोटे-छोटे खर्चों में कटौती कर बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद करने का निर्णय लिया।
सीमित संसाधनों के बावजूद पहाड़ी और दूरदराज क्षेत्र में रहने वाले इन बच्चों ने अपनी पॉकेट मनी से राशि बचाकर जो योगदान दिया, वह समाज के लिए प्रेरणादायक माना जा रहा है। इस पहल से बच्चों में जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशीलता, सेवा भावना और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को भी मजबूती मिली है।
कार्यक्रम में अधिकारी और शिक्षा विभाग के अधिकारी रहे मौजूद
बच्चों द्वारा सहायता राशि सौंपे जाने के अवसर पर शासन और शिक्षा विभाग के कई अधिकारी मौजूद रहे। इनमें सहायक परियोजना अधिकारी दीपक टिके, कार्यालय अधीक्षक योगेश भोये, शिक्षा विस्तार अधिकारी सोमनाथ धोंडे, आश्रम स्कूल के मुख्याध्यापक डी. जे. जामनिक तथा विद्यार्थी प्रतिनिधि कुंदन वळे और दर्शना गांगोडा शामिल रहे।
स्कूल की गतिविधियों का भी लिया जायजा
इस दौरान सहायक जिलाधिकारी डॉ. अपूर्वा बासुर ने आश्रम स्कूल का दौरा कर वहां संचालित विभिन्न गतिविधियों का जायजा लिया। उन्होंने बच्चों से संवाद किया और उनके प्रयासों की सराहना की।
बच्चों का उत्साह बढ़ाते हुए डॉ. बासुर ने कहा कि बच्चों में समाज सेवा की समझ विकसित करने और उनके व्यक्तित्व को बेहतर बनाने वाली ऐसी गतिविधियां लगातार आयोजित होनी चाहिए। उन्होंने बच्चों के इस प्रयास की प्रशंसा करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
छोटे हाथों से बड़ी मिसाल
जव्हार के दूरदराज और आदिवासी क्षेत्र से आने वाले इन बच्चों ने आपदा के समय जिस संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का परिचय दिया है, उसकी सराहना हो रही है। अपनी जरूरतों के लिए मिलने वाली छोटी-सी पॉकेट मनी में से राशि बचाकर बाढ़ पीड़ितों की मदद करना यह संदेश देता है कि मदद के लिए बड़ी उम्र या बड़ी रकम नहीं, बल्कि बड़ा दिल और अच्छे संस्कार जरूरी होते हैं।






