NEET-UG 2026 री-एग्जाम से ठीक पहले केंद्र सरकार द्वारा Telegram पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Telegram ने इस फैसले को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कंपनी ने मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब 21 जून को NEET-UG री-एग्जाम आयोजित होने वाला है और परीक्षा की सुरक्षा को लेकर सरकार और एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं।

NTA की सिफारिश पर लिया गया फैसला
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की सिफारिश पर केंद्र सरकार ने Telegram पर 24 घंटे का अस्थायी प्रतिबंध लगाया था। सरकार का कहना है कि पिछले कुछ समय में परीक्षा से जुड़े पेपर लीक और फर्जी संदेशों के प्रसार में Telegram के कुछ चैनलों और समूहों का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा Telegram को 30 जून तक अपने मैसेज एडिटिंग फीचर को भी बंद रखने का निर्देश दिया गया है। NTA का दावा है कि कुछ गिरोह परीक्षा के बाद प्रश्नपत्र अपलोड कर संदेशों को एडिट कर पुराने टाइमस्टैम्प दिखाते थे, जिससे पेपर लीक का भ्रम पैदा किया जाता था।
Telegram ने फैसले को बताया अनुचित
Telegram के CEO पावेल ड्यूरोव ने सरकार के इस कदम की आलोचना की है। उनका कहना है कि इस तरह का प्रतिबंध मूल समस्या का समाधान नहीं करता बल्कि करोड़ों सामान्य उपयोगकर्ताओं को प्रभावित करता है। ड्यूरोव के अनुसार भारत में Telegram के 15 करोड़ से अधिक यूजर्स हैं, जो शिक्षा, व्यवसाय और व्यक्तिगत संवाद के लिए इस प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हैं। कंपनी का तर्क है कि कुछ गलत तत्वों की वजह से पूरे प्लेटफॉर्म को बंद करना उचित नहीं है और इससे डिजिटल स्वतंत्रता पर भी सवाल खड़े होते हैं।
सुरक्षा बनाम डिजिटल स्वतंत्रता की बहस
इस फैसले को लेकर छात्रों, अभिभावकों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच अलग-अलग राय सामने आ रही है। कई छात्र संगठनों ने परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सरकार के कदम का समर्थन किया है। वहीं, कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि VPN जैसे विकल्पों के कारण प्रतिबंध का प्रभाव सीमित रह सकता है। अब सभी की नजर दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी है, जहां यह तय होगा कि परीक्षा सुरक्षा के नाम पर लगाए गए इस प्रतिबंध को कानूनी मंजूरी मिलती है या Telegram को राहत मिलती है।







