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कश्मीर में उग्रवाद जांच तेज, NIA ने शाहीन लोन के ठिकाने पर की तलाशी

By Neha
On: Wednesday, June 17, 2026 2:01 PM
कश्मीर में उग्रवाद जांच तेज, NIA ने शाहीन लोन के ठिकाने पर की तलाशी
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कश्मीर में उग्रवाद से जुड़े मामलों पर कार्रवाई जारी रखते हुए NIA ने बारामूला के कनिस्पोरा इलाके में तलाशी अभियान चलाया। यह छापा एक पुराने हथियार बरामदगी मामले की जांच का हिस्सा है, जिसमें तिहाड़ जेल में बंद आरोपी शाहीन अहमद लोन का नाम सामने आया था।

बारामूला में NIA का सर्च ऑपरेशन

National Investigation Agency (NIA) ने उत्तरी कश्मीर के Baramulla जिले के कनिस्पोरा क्षेत्र में तलाशी अभियान चलाया। एजेंसी की टीमों ने शाहीन अहमद लोन के आवास पर छापा मारा, जो वर्तमान में एक उग्रवाद संबंधी मामले में तिहाड़ जेल में बंद है।

संपत्ति जब्ती के आदेश के बाद कार्रवाई

यह कार्रवाई उस समय हुई है जब NIA एक्ट के तहत नामित विशेष अदालत ने शाहीन अहमद लोन की अचल संपत्तियों को जब्त करने संबंधी एजेंसी की याचिका को मंजूरी दी थी। यह प्रक्रिया Unlawful Activities (Prevention) Act के प्रावधानों के तहत की जा रही है।

2020 के हथियार बरामदगी मामले से जुड़ा मामला

जांच एजेंसियों के अनुसार यह मामला जनवरी 2020 में कुलगाम जिले के मीर बाजार क्षेत्र में एक वाहन से हथियार और गोला-बारूद बरामद होने की घटना से जुड़ा है। सुरक्षा एजेंसियों द्वारा वाहन की तलाशी के दौरान कथित रूप से आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई थी, जिसके बाद जांच केंद्र सरकार द्वारा NIA को सौंपी गई।

शाहीन लोन पर क्या हैं आरोप?

NIA का आरोप है कि शाहीन अहमद लोन प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों के लिए कथित तौर पर ओवरग्राउंड वर्कर (OGW) के रूप में काम करता था। एजेंसी के अनुसार उस पर नियंत्रण रेखा (LoC) के पार से हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री लाने तथा उन्हें घाटी में सक्रिय उग्रवादियों तक पहुंचाने में सहयोग करने का आरोप है।

बरामद सामग्री पर नहीं दी गई जानकारी

तलाशी अभियान के बाद अधिकारियों ने तत्काल यह जानकारी साझा नहीं की कि छापेमारी के दौरान क्या सामग्री बरामद हुई है। एजेंसी मामले की जांच आगे बढ़ा रही है और जब्त दस्तावेजों या अन्य सबूतों का विश्लेषण किया जा रहा है।

सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ी सक्रियता

जम्मू-कश्मीर में उग्रवाद से जुड़े मामलों पर हाल के वर्षों में जांच एजेंसियों ने अपनी कार्रवाई तेज की है। वित्तीय नेटवर्क, लॉजिस्टिक सपोर्ट और कथित ओवरग्राउंड वर्कर्स की भूमिका की जांच पर विशेष फोकस रखा जा रहा है।

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