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पालघर जिला: आसमानी बिजली से बचने और उसे समझने के लिए खास बैठक का आयोजन

On: Thursday, June 4, 2026 11:03 PM
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पालघर:
पालघर के जिलाधिकारी डॉ. इंदुराणी जाखड और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में जिला आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा एक विशेष बैठक (चर्चासत्र) रखी गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य लोगों को आसमानी बिजली के खतरे से बचाना था। लातूर विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ प्रो. डॉ. प्रमोद पाटिल ने इस बैठक में सभी को जरूरी जानकारियां दीं। बैठक में गांव के अधिकारी (ग्राम विकास अधिकारी, तलाठी), राहत दल (NDRF) के जवान और आपदा मित्र शामिल हुए।

१० साल में २७ मौतें: मानसून के पहले और बाद में ज्यादा खतरा
पालघर जिला जब से बना है (साल २०१४) तब से लेकर साल २०२५ तक बिजली गिरने की वजह से २७ लोगों की जान जा चुकी है। बैठक में बताया गया कि बारिश शुरू होने से ठीक पहले (प्री-मानसून) और बारिश खत्म होने के बाद के मौसम में बिजली गिरने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। इसलिए इस समय लोगों को बहुत सावधान रहने की जरूरत है।

आपके इलाके में कितना खतरा है?
सबसे ज्यादा खतरा (हाई रिस्क): जव्हार, मोखाडा और विक्रमगड। इन तीन तहसीलों में सबसे ज्यादा बिजली गिरती है।
मध्यम खतरा (मीडियम रिस्क): डहाणू, तलासरी और वाडा। यहाँ तूफानी मौसम में बिजली गिरने का डर रहता है।
जान बचाने वाला ‘३०-३० का फॉर्मूला’ (नियम)
बैठक में बिजली से बचने का एक बहुत आसान नियम बताया गया, जिसे ३०-३० का फॉर्मूला कहते हैं:

  1. पहला ३०: अगर आपको बिजली की चमक दिखाई दे और उसके ३० सेकंड के अंदर ही बादलों की गड़गड़ाहट सुनाई दे, तो समझ जाएं कि बिजली आपके आसपास (५ किलोमीटर के दायरे में) ही गिरी है। तुरंत किसी सुरक्षित जगह भागें।
  2. दूसरा ३०: बिजली कड़कना बंद होने के बाद भी कम से कम ३० मिनट तक अपनी सुरक्षित जगह से बाहर न निकलें। युवाओं को ज्यादा खतरा और बिजली का वैज्ञानिक सच

एक रिसर्च में सामने आया है कि बिजली गिरने से मरने वालों में १५ से ४० साल के पुरुषों की संख्या सबसे ज्यादा है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि युवा अक्सर लापरवाही करते हैं, जानकारी की कमी होती है या उन्हें छुपने के लिए सही जगह नहीं मिलती।
एक अच्छी बात: बिजली गिरना एक प्राकृतिक क्रिया है। जब बिजली गिरती है, तो हवा की नाइट्रोजन गैस पानी में मिलकर जमीन में जाती है, जिससे खेतों को प्राकृतिक खाद (नत्र) मिलती है।

बिजली चमकते समय क्या करें और क्या न करें?(जरूरी नियम)
घर कैसा हो? हमारे घर की ऊंचाई पास के मंदिर के शिखर (कळस) से कम होनी चाहिए।
लोहे का सामान: अगर अचानक बिजली कड़कने लगे, तो घर के अंदर रखी लोहे की चीजों को तुरंत आंगन (बाहर) में डाल दें।
झोपड़ी या अस्तबल में न रुकें: बिजली चमकते समय घास-फूस की झोपड़ी, टिनशेड या मवेशियों के तबेले (गोठे) में खड़े न हों। पक्के और बंद मकान में जाएं।
मोबाइल का इस्तेमाल: बिजली कड़कते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल बिल्कुल न करें।
एक साथ न खड़े हों: बहुत सारे लोग एक जगह चिपककर खड़े न हों, बल्कि एक-दूसरे से दूर-दूर बैठें।
पेड़ और पानी से दूर रहें: ऊंचे पेड़ों के नीचे, बिजली के खंभों के पास, सड़क किनारे या नदी-तालाब के पास बिल्कुल न खड़े हों।
खुले मैदान में फंस जाएं तो: अगर आप खुले खेत या मैदान में हैं और भागने का रास्ता न हो, तो पैरों के नीचे कोई प्लास्टिक की थैली, सूखी लकड़ी या बोरी रख लें और घुटनों के बल बैठ जाएं।
दामिनी ऐप (Damini App): बिजली गिरने से पहले ही पशु-पक्षियों को इसका अहसास हो जाता है। इंसानों के लिए सरकार ने ‘दामिनी ऐप’ बनाया है। इसे मोबाइल में डाउनलोड करें, यह बिजली गिरने की चेतावनी पहले ही दे देता है।
गाड़ी में गाड़ी के अंदर रहें: अगर आप कार या जीप में हैं, तो खिड़की-दरवाजे बंद करके अंदर ही बैठे रहें, गाड़ी की किसी लोहे की चीज को न छुएं। अगर मोटरसाइकिल पर हैं, तो गाड़ी किनारे खड़ी कर किसी पक्के मकान में चले जाएं।

सरकारी मदद और जागरूकता की अपील

अगर बिजली गिरने से किसी की मौत हो जाती है, तो सरकार उसके परिवार को ४ लाख रुपये की मदद देती है। लेकिन चूंकि इसे ‘प्राकृतिक आपदा’ माना जाता है, इसलिए परिवार कई अन्य सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाता है। बैठक में अधिकारियों ने अपील की कि पैसों की मदद से ज्यादा जरूरी जान बचाना है, इसलिए सभी लोग इन नियमों को समझें और दूसरों को भी बताएं।

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