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राजनीति में महिलाओं पर टिप्पणी कर पप्पू यादव घिरे, विपक्ष ने साधा निशाना

By Neha
On: Wednesday, April 22, 2026 2:11 PM
राजनीति में महिलाओं पर टिप्पणी कर पप्पू यादव घिरे, विपक्ष ने साधा निशाना
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बिहार की राजनीति में उस समय बड़ा विवाद खड़ा हो गया जब पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव का एक बयान सामने आया। उनके बयान को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। पप्पू यादव ने राजनीति में महिलाओं की भूमिका को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा कि आज के समय में महिलाओं का राजनीति में आगे बढ़ना आसान नहीं है और उन्हें कई तरह के समझौतों का सामना करना पड़ता है। उनके इस बयान के सामने आते ही विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई और इसे आपत्तिजनक करार दिया।

महिलाओं को लेकर दिए गए बयान पर उठे सवाल

पप्पू यादव ने अपने बयान में दावा किया कि राजनीति में महिलाओं की एंट्री कई बार संदिग्ध परिस्थितियों से जुड़ी होती है और उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में महिला नेता बिना पुरुष नेताओं के प्रभाव के आगे नहीं बढ़ पातीं। इस बयान को लेकर राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। कई लोगों ने इसे महिलाओं के सम्मान के खिलाफ बताते हुए कड़ी आलोचना की है। सोशल मीडिया पर भी इस बयान को लेकर भारी नाराजगी देखने को मिल रही है और लोग इसे महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला बता रहे हैं।

प्रियंका चतुर्वेदी और नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया

इस विवाद पर शिवसेना (यूबीटी) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे शर्मनाक और घिनौना बयान बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए कहा कि इस तरह की मानसिकता महिलाओं को राजनीति से दूर रखने का प्रयास करती है। वहीं महाराष्ट्र सरकार के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने भी इस बयान की निंदा की और कहा कि यह भारत की संस्कृति और परंपरा के खिलाफ है। उन्होंने यहां तक कहा कि ऐसे बयानों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि समाज में गलत संदेश न जाए।

महिला आयोग की सख्ती, तीन दिन में मांगा जवाब

इस पूरे मामले में बिहार राज्य महिला आयोग ने भी स्वतः संज्ञान लेते हुए पप्पू यादव को नोटिस जारी किया है। आयोग की अध्यक्ष अप्सरा ने नोटिस में कहा है कि सांसद के बयान से महिलाओं की सामाजिक प्रतिष्ठा और आत्मसम्मान को ठेस पहुंची है। आयोग ने उन्हें तीन दिनों के भीतर जवाब देने को कहा है और यह भी पूछा है कि क्यों न उनके खिलाफ लोकसभा अध्यक्ष को सदस्यता रद्द करने की अनुशंसा की जाए। इस कार्रवाई के बाद मामला और गंभीर हो गया है और राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया है।

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