नवी मुंबई: महाराष्ट्र शासन के एक अत्यंत महत्वपूर्ण उपक्रम ‘महिला आर्थिक विकास महामंडळ’ (माविम) ने पिछले पांच दशकों से राज्य की महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक सशक्तिकरण की नींव को सुदृढ़ किया है। 24 फरवरी 1975 को स्थापित इस संस्था की व्यापकता और दूरदर्शिता को देखते हुए, 20 जनवरी 2003 को राज्य सरकार ने इसे महिला विकास की राज्य स्तरीय ‘शिखर संस्था’ (Apex Body) घोषित किया था। आज ‘माविम’ केवल एक संस्था नहीं, बल्कि केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने वाली एक प्रभावी ‘नोडल एजेंसी’ के रूप में स्थापित हो चुकी है।

विस्तार और संगठन की शक्ति
‘माविम’ का कार्यक्षेत्र आज महाराष्ट्र के सभी 36 जिलों तक फैल चुका है, जिसमें मुंबई उपनगर सहित 259 नगरीय निकाय और 10,495 गाँव शामिल हैं। महामंडल ने अब तक 20.74 लाख महिलाओं को 1,68,361 स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से संगठित किया है। वित्तीय अनुशासन का प्रमाण यह है कि इन समूहों ने बैंकों से 6,539 करोड़ रुपये का ऋण प्राप्त किया है, जिसकी पुनर्भुगतान दर 99.5 प्रतिशत है, जो बैंकिंग क्षेत्र के लिए एक मिसाल है।
क्षमता विकास और आत्मनिर्भरता
ग्रामीण महिलाओं में आत्मविश्वास जगाना और उन्हें मुख्यधारा के रोजगार से जोड़ना महामंडल का मूल उद्देश्य है। ‘माविम’ केवल वित्तीय सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को शिक्षा, संपत्ति के अधिकार और निर्णय लेने की प्रक्रिया में भागीदार बनाने पर विशेष बल देता है।
संस्थागत ढांचे को मजबूत करने के लिए स्वयं सहायता समूह (SHG), ग्राम संगठन (VO) और 361 समुदाय प्रबंधित संसाधन केंद्रों (CMRC) का जाल बिछाया गया है। उल्लेखनीय है कि इनमें से 79 प्रतिशत ‘लोक संस्थाएं’ (CMRC) आज पूर्णतः आत्मनिर्भर होकर संचालित हो रही हैं।
प्रमुख परियोजनाएं और उपलब्धियां
आर्थिक सशक्तिकरण के साथ-साथ ‘माविम’ लिंग समानता, कानूनी जागरूकता और स्वास्थ्य जैसे सामाजिक विषयों पर भी सक्रिय है। वर्तमान में महामंडल के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं संचालित हैं:
नवतेजस्विनी: महाराष्ट्र ग्रामीण महिला उद्यम विकास परियोजना।
NULM एवं MSRLM: शहरी और ग्रामीण आजीविका मिशनों का प्रभावी क्रियान्वयन।
वॉश (WASH): जल, स्वच्छता और व्यक्तिगत स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता।
स्पार्क (SPARK): दिव्यांग समावेशी ग्रामीण परिवर्तन परियोजना।
राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान
इन प्रयासों के फलस्वरूप महिलाओं की मासिक आय में 5,000 से 20,000 रुपये तक की वृद्धि दर्ज की गई है। ‘माविम’ की इस सफलता को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। संस्था को अब तक ‘स्कोच गोल्ड अवार्ड’, ‘फिक्की स्वच्छता पुरस्कार’ और नाबार्ड द्वारा ‘सर्वश्रेष्ठ फेडरेशन’ जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है।
महिलाओं को केवल ऋण लेने वाला न बनाकर उन्हें संपत्ति का स्वामी बनाना और पंचायत राज संस्थाओं में उनका नेतृत्व विकसित करना ‘माविम’ का अंतिम लक्ष्य है। आज यह महामंडल महाराष्ट्र की महिलाओं के स्वाभिमान, स्वावलंबन और प्रगति का एक सशक्त वैश्विक प्रतीक बन चुका है।
विभागीय सूचना कार्यालय, कोंकण विभाग, नवी मुंबई।








