पालघर: देश के विकास का रोडमैप तैयार करने वाली जनगणना इस बार आधुनिक स्वरूप में नजर आने वाली है। वर्ष २०२७ में होने वाली यह जनगणना भारत के इतिहास की पहली *’डिजिटल जनगणना’* होगी। इसी क्रम में पालघर जिला प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है। जिलाधिकारी डॉ. इंदु रानी जाखड़ के कुशल मार्गदर्शन में प्रशिक्षण की प्रक्रिया को गति दी जा रही है, जिससे अब पूरा प्रशासनिक तंत्र ‘डिजिटल मोड’ में नजर आ रहा है।

बदलता स्वरूप: कागजरहित और सटीक आंकड़े
पिछले कई दशकों से जनगणना का अर्थ कागजी फॉर्मों का अंबार और महीनों तक चलने वाली डेटा एंट्री माना जाता था। लेकिन अब यह तस्वीर पूरी तरह बदलने वाली है। *मोबाइल ऐप और CMMS (Census Management and Monitoring System) पोर्टल* के उपयोग से जानकारी दर्ज होते ही रियल-टाइम में सर्वर पर अपडेट हो जाएगी। इससे न केवल डेटा में मानवीय त्रुटियों की संभावना कम होगी, बल्कि आंकड़ों की सटीकता और सुरक्षा भी बढ़ेगी।
नागरिकों को ‘स्व-गणना’ का ऐतिहासिक अवसर
इस जनगणना की सबसे बड़ी विशेषता *’Self Enumeration’ (स्व-गणना)* का विकल्प है।
अवधि: १ अप्रैल से १५ मई २०२६ तक
इस अवधि के दौरान नागरिक किसी सरकारी कर्मचारी की प्रतीक्षा किए बिना, अपनी सुविधानुसार पोर्टल पर जाकर स्वयं अपनी जानकारी भर सकेंगे। इससे साक्षर और कामकाजी वर्ग के समय की बचत होगी और प्रशासनिक मशीनरी पर काम का बोझ भी कम होगा।
पालघर जिले की सूक्ष्म योजना
जिलाधिकारी कार्यालय में आयोजित तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर में विशेषज्ञ मिलिंद पाटिल, के. एम. भंडारी और संतोष वाघ ने क्षेत्रीय प्रशिक्षकों को आधुनिक तकनीक के गुर सिखाए। उपजिल्हाधिकारी (सामान्य प्रशासन) रणजीत देसाई की देखरेख में प्रगणकों और पर्यवेक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया अंतिम चरण में है। आगामी १६ मई से प्रत्यक्ष क्षेत्रीय कार्य (Field Work) प्रारंभ होगा, जिसमें मकानों की सूची तैयार करना और आवासीय गणना जैसे महत्वपूर्ण चरण पूरे किए जाएंगे।
क्यों खास है यह जनगणना?
यह देश की *१६वीं जनगणना* है। डिजिटल माध्यम से न केवल जनसंख्या, बल्कि नागरिकों के सामाजिक एवं आर्थिक स्तर, जातिगत गणना और नागरिक सुविधाओं की उपलब्धता का सटीक डेटा सरकार को प्राप्त होगा। इसी डेटा के आधार पर आगामी दशक की सरकारी योजनाओं, बजट आवंटन और विकास कार्यों की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
नागरिकों की जिम्मेदारी
डिजिटल प्रणाली कितनी भी सक्षम क्यों न हो, उसकी सफलता नागरिकों द्वारा दी गई जानकारी की ‘सत्यता’ पर निर्भर करती है। जैसा कि उपजिल्हाधिकारी रणजीत देसाई ने आह्वान किया है, प्रगणक जब आपके द्वार पर आएं, तो उन्हें दी गई जानकारी देश की भविष्य की नीतियों का आधार बनेगी। अतः पालघर के नागरिकों से इस राष्ट्रीय महायज्ञ में सक्रिय और ईमानदार सहभागिता की अपेक्षा है।







