पश्चिम बंगाल के नए राज्यपाल रवींद्र नारायण रवि ने कोलकाता के लोक भवन में शपथ ली। उन्हें शपथ कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस सुजॉय पाल ने दिलाई। समारोह में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती, असेंबली स्पीकर बिमान बनर्जी, लेफ्ट फ्रंट के चेयरमैन बिमान बोस और कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। शपथ ग्रहण समारोह सुबह 11:30 बजे शुरू हुआ और इसमें राष्ट्रगान और वंदे मातरम की भी ध्वनि गुंज रही। शपथ लेने के बाद राज्यपाल ने मुख्यमंत्री और उपस्थित मेहमानों से बातचीत की।

राज्यपाल ने बंगाल की संस्कृति और गौरव की सराहना की
शपथ ग्रहण के बाद जारी बयान में रवींद्र नारायण रवि ने कहा कि उन्हें पश्चिम बंगाल के लोगों की सेवा करने का अवसर पाकर बहुत खुशी और विनम्रता महसूस हो रही है। उन्होंने कहा कि यह भूमि भारत की आध्यात्मिक, बौद्धिक और सांस्कृतिक राजधानी रही है। उन्होंने बंगाल के गौरवपूर्ण इतिहास और संस्कृति की भी सराहना की। रवि ने कहा कि यह वह भूमि है जहां वेदों का ज्ञान फला-फूला, गौतम बुद्ध की शिक्षाओं को नया आयाम मिला, भक्ति की परंपरा विकसित हुई और राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन की नींव पड़ी।
महान व्यक्तित्वों और क्रांतिकारियों को याद किया
राज्यपाल ने कहा कि पश्चिम बंगाल ने चैतन्य महाप्रभु, रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद, बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय, रवींद्रनाथ टैगोर, श्री अरबिंदो, सुभाष चंद्र बोस और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे महान व्यक्तित्वों और क्रांतिकारियों को जन्म दिया है। उन्होंने कहा कि मां दुर्गा से प्रार्थना करते हैं कि उन्हें इस भूमि के लोगों की सेवा करने की बुद्धि और शक्ति प्रदान करें। रवि ने विदेशी हमलों और इतिहास की कठिन परिस्थितियों में बंगाल की संस्कृति और पहचान की सुरक्षा की भी बात कही।
रवि का राजनीति और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से संबंध
सीवी आनंद बोस के इस्तीफे के बाद रवींद्र नारायण रवि को पश्चिम बंगाल का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया। इससे पहले वह तमिलनाडु के राज्यपाल थे और वहां उन्होंने एमके स्टालिन सरकार के साथ कई बिलों और मुद्दों पर टकराव किया था। स्टालिन ने पहले उन्हें हटाने के लिए राष्ट्रपति से भी मांग की थी। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बंगाल में चुनावों के बाद रवि और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच संबंध कैसे विकसित होते हैं और प्रशासनिक कामकाज में किस तरह संतुलन बना रहता है।







