मुंबई | खबरदीप ब्यूरो महाराष्ट्र की जीवनरेखा मानी जाने वाली MSRTC (एसटी) की यात्रा को अब और अधिक सुरक्षित और अनुशासित बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। परिवहन मंत्री तथा एसटी महामंडल के अध्यक्ष प्रताप सरनाईक ने घोषणा की है कि कर्तव्य के दौरान मद्यपान करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ ‘शून्य सहनशीलता’ (Zero Tolerance) की नीति अपनाई जाएगी। अब राज्य के प्रत्येक डिपो (आगार) में चालकों और परिचालकों की दैनिक ‘अल्कोटेस्ट’ जाँच अनिवार्य कर दी गई है।

औचक निरीक्षण में हुआ था खुलासा इस कठोर निर्णय की पृष्ठभूमि 25 जनवरी को मंत्री सरनाईक द्वारा मुंबई के परेल बस डिपो के औचक निरीक्षण के दौरान तैयार हुई थी। उस वक्त विश्राम गृहों में शराब की बोतलें और कुछ कर्मचारी नशे की हालत में पाए गए थे। इस घटना को गंभीरता से लेते हुए मंत्री ने तत्काल एक उच्च स्तरीय जाँच समिति गठित की थी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर अब न केवल दोषी कर्मचारियों, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों पर भी दंडात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
प्रमुख सुधार: अब हर डिपो में लागू होंगे ये नियम एसटी प्रशासन द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाया गया है:
ड्यूटी से पहले अनिवार्य जाँच: डिपो में हाजिरी के समय चालक और परिचालक की ‘अल्कोटेस्ट’ मशीन से जाँच होगी। रिपोर्ट सामान्य आने पर ही उन्हें बस ले जाने की अनुमति मिलेगी।
सफर के दौरान निगरानी: यात्रा के दौरान जब चालक कंट्रोल रूम में लॉगबुक की एंट्री करेगा, तब उसकी दोबारा जाँच की जा सकती है। बिना उचित रिकॉर्ड के बस आगे नहीं बढ़ सकेगी।
अधिकारियों की जवाबदेही: यदि किसी डिपो में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो आगार प्रबंधक (डिपो मैनेजर) और संबंधित निरीक्षक को सीधे तौर पर जिम्मेदार माना जाएगा।
विश्राम गृहों का कायाकल्प: कर्मचारियों के ठहरने के स्थानों पर स्वच्छता, शुद्ध पेयजल और समुचित बिजली व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रबोधन से परिवर्तन की ओर सरकार का मानना है कि केवल दंडात्मक कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं है। विभाग अब कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक सुधार पर भी ध्यान केंद्रित करेगा। इसके तहत:
आगारों में ‘मद्यपान जनजागृति सप्ताह’ का आयोजन होगा।
सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से कर्मचारियों की नियमित काउंसलिंग की जाएगी।
“यात्रियों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। नशे की हालत में किसी की जान जोखिम में डालने की अनुमति कतई नहीं दी जा सकती। यह कदम एसटी सेवा को अधिक विश्वसनीय और सुरक्षित बनाएगा।” > — प्रताप सरनाईक, परिवहन मंत्री, महाराष्ट्र
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नियम: ड्यूटी की शुरुआत और मार्ग के बीच में दोहरी अल्कोटेस्ट जाँच।
सख्ती: गोपनीय सतर्कता दल द्वारा बस स्टैंडों पर औचक छापेमारी
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सुविधा: कर्मचारी विश्राम गृहों की सुविधाओं के आधुनिकीकरण के आदेश।
प्रस्तुति: खबरदीप जनमंच डेस्क








