मनोर, पालघर | 9 जनवरी 2026
मनोर से होकर प्रस्तावित बायपास सड़क परियोजना के संदर्भ में ग्राम पंचायत मनोर द्वारा पूर्व में भी एक ग्रामसभा बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें परियोजना को लेकर प्रारंभिक चर्चा की गई थी। उस समय संबंधित विभागों की ओर से आवश्यक तकनीकी विवरण, सर्वे अभिलेख एवं प्रशासनिक स्पष्टता उपलब्ध न कराए जाने के कारण कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका था।
उक्त पृष्ठभूमि में दिनांक 9 जनवरी 2026 को ग्राम पंचायत मनोर द्वारा एक विशेष एवं निर्णायक ग्रामसभा का आयोजन किया गया। ग्रामसभा की शुरुआत राष्ट्रगान “जन गण मन” के सामूहिक गायन से की गई। यह बैठक ग्राम पंचायत सरपंच श्री चेतन पाटील तथा ग्राम विकास अधिकारी श्री नितिन पवार की अध्यक्षता में ग्रामसभा सदस्यों एवं ग्रामवासियों की उपस्थिति में संपन्न हुई। बैठक का मुख्य उद्देश्य पूर्व ग्रामसभा में उठे मुद्दों पर पुनः विचार कर ग्राम पंचायत का स्पष्ट एवं सामूहिक निर्णय तय करना था।
ग्रामसभा के दौरान ग्रामवासियों एवं ग्राम पंचायत सदस्यों ने यह गंभीर आरोप लगाए कि बायपास सड़क परियोजना की प्रारंभिक तैयारियां बिना किसी ठोस सैद्धांतिक अध्ययन तथा समुचित जमीनी सत्यापन के की जा रही हैं। ग्रामवासियों का कहना था कि परियोजना से पूर्व न तो ग्राम पंचायत के साथ कोई औपचारिक चर्चा की गई और न ही स्थानीय नागरिकों को विश्वास में लेकर स्थल निरीक्षण अथवा सामाजिक प्रभाव आकलन प्रस्तुत किया गया।
बैठक में यह विषय विशेष रूप से सामने आया कि प्रस्तावित बायपास मार्ग से संबंधित दर्शाए गए सर्वे नंबर (गट क्रमांक) ग्राम पंचायत के पास उपलब्ध आधिकारिक गांव नक्शों से मेल नहीं खाते। ग्राम पंचायत की ओर से बताया गया कि—
परियोजना में दर्शाए गए गट क्रमांक ग्राम पंचायत के प्रामाणिक गांव नक्शों से असंगत हैं,
इस संबंध में ग्राम पंचायत को किसी भी राजपत्र, अधिसूचना अथवा अधिकृत लिखित सूचना के माध्यम से पूर्व जानकारी नहीं दी गई,
सर्वे कब, किस प्रक्रिया से और किस सक्षम प्राधिकरण द्वारा किया गया, इसकी स्पष्ट जानकारी ग्राम पंचायत एवं ग्रामवासियों को उपलब्ध नहीं कराई गई।
ग्रामसभा में यह भी उल्लेख किया गया कि बायपास परियोजना से संबंधित विभागों के अधिकारी बैठक में उपस्थित नहीं रहे। अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण ग्रामसभा में उठाए गए तकनीकी, प्रशासनिक एवं सामाजिक प्रश्नों पर कोई प्रत्यक्ष स्पष्टीकरण प्राप्त नहीं हो सका, जिससे ग्रामवासियों में असंतोष व्याप्त रहा और कुछ समय के लिए बैठक का वातावरण तनावपूर्ण हो गया।
ग्रामवासियों ने यह आशंका भी व्यक्त की कि यदि बिना समुचित अध्ययन एवं स्थानीय सहमति के बायपास सड़क का निर्धारण किया गया, तो इससे गांव की आबादी, आदिवासी क्षेत्रों तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की भूमि, आवास एवं आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ग्राम पंचायत पदाधिकारियों एवं वरिष्ठ ग्रामवासियों के बीच संवाद स्थापित किया गया, जिसके पश्चात बैठक की कार्यवाही शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़ाई गई। विस्तृत विचार-विमर्श के उपरांत 9 जनवरी 2026 की ग्रामसभा में यह सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि ग्राम पंचायत एवं ग्रामवासियों की स्पष्ट सहमति के बिना बायपास परियोजना से संबंधित कोई भी अंतिम निर्णय स्वीकार नहीं किया जाएगा।
ग्रामसभा में यह भी स्पष्ट किया गया कि ग्रामवासी विकास के विरोधी नहीं हैं, किंतु बायपास सड़क परियोजना निम्न शर्तों के अधीन ही स्वीकार्य होगी
किसी भी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अथवा अन्य वर्ग के नागरिक को किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे,
किसी का आवास, भूमि अथवा आजीविका प्रभावित न हो,
परियोजना से पूर्व सभी तकनीकी, सामाजिक एवं प्रशासनिक तथ्यों को ग्रामसभा के समक्ष पूर्ण पारदर्शिता के साथ प्रस्तुत किया जाए।
ग्राम पंचायत की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि जब तक संबंधित विभाग सर्वे प्रक्रिया, गट क्रमांक एवं गांव नक्शों से संबंधित संपूर्ण एवं प्रमाणिक जानकारी ग्रामसभा में प्रस्तुत नहीं करते, तब तक ग्रामीणों की शंकाओं का समाधान संभव नहीं है।
ग्रामसभा का समापन राष्ट्रगीत “सुजल सुफलाम् मलयज शीतलाम्” के सामूहिक गायन के साथ किया गया। बैठक में यह संदेश दोहराया गया कि ग्रामवासी विकास के समर्थक हैं, लेकिन बिना जमीनी अध्ययन, बिना स्थानीय सहभागिता और बिना पारदर्शिता के किसी भी परियोजना को आगे बढ़ाना स्वीकार्य नहीं होगा।







