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जमानत के बाद भी नहीं मिली राहत: 111 करोड़ के फर्जीवाड़े में आरोपी फिर पुलिस गिरफ्त में |

On: Saturday, January 3, 2026 12:32 PM
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पालघर/ज्वाहर

जव्हार में सार्वजनिक बांधकाम विभाग (PWD) के नाम पर किए गए 111 करोड़ 63 लाख रुपये से अधिक के महाजालसाजी प्रकरण में आरोपियों को जमानत मिलने के बावजूद राहत नहीं मिल सकी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने आरोपियों को पुनः पुलिस हिरासत में भेजने के आदेश दिए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिनांक 28 नवंबर 2025 को सार्वजनिक बांधकाम विभाग, जव्हार कार्यालय के नाम से एक धनादेश क्रमांक 069218 तैयार किया गया, जिस पर लेखा अधिकारी एवं कार्यकारी अभियंता के जाली हस्ताक्षर किए गए थे। इस धनादेश में ₹1,11,63,31,810/- (एक सौ ग्यारह करोड़ तिरसठ लाख इकतीस हजार आठ सौ दस रुपये मात्र) की राशि अंकित कर उसे ओवी कंस्ट्रक्शन के नाम जारी दर्शाया गया।

यह धनादेश स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, शाखा जव्हार में आरोपी यज्ञेश दिनकर अंभिरे द्वारा भुनाने हेतु जमा किया गया। हालांकि तकनीकी जांच के चलते उक्त धनादेश का भुगतान नहीं हो सका। इसके बाद ओवी कंस्ट्रक्शन के मालिक निलेश रमेश पडवळे द्वारा भी धनादेश भुनाने का प्रयास किया गया।

जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि यह धनादेश सार्वजनिक बांधकाम विभाग द्वारा जारी ही नहीं किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए कार्यकारी अभियंता श्री नितीन भोये ने जव्हार पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। जांच में यह सामने आया कि निलेश रमेश पडवळे (आरोपी क्रमांक 1) एवं यज्ञेश दिनकर अंभिरे (आरोपी क्रमांक 2) ने आपस में साजिश रचकर शासन की आर्थिक ठगी करते हुए अवैध लाभ प्राप्त करने का प्रयास किया।

इस शिकायत के आधार पर जव्हार पुलिस थाना अपराध रजिस्टर नंबर 281/2025 के अंतर्गत भारतीय न्याय संहिता अधिनियम, 2023 की धाराएँ 336, 338, 318(1), 318(4), 3(5), 61(2), 305 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66 के तहत 28/11/2025 को रात 11:11 बजे अपराध दर्ज किया गया।

पुलिस जांच के दौरान दोनों आरोपियों को 29/11/2025 को गिरफ्तार कर 6 दिनों की पुलिस हिरासत में लिया गया था। इसके पश्चात बढ़ी हुई पुलिस हिरासत मंजूर न होने के कारण उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया और बाद में वे जमानत पर रिहा हो गए।

हालांकि, चूंकि अपराध की जांच अभी अधूरी थी और कई अहम पहलुओं की पड़ताल शेष थी, इसलिए आरोपियों की पुनः पुलिस हिरासत आवश्यक मानी गई। इसी क्रम में आर्थिक अपराध शाखा (EOW), पालघर द्वारा माननीय अपर जिला एवं सत्र न्यायालय, भिवंडी में रिवीजन अपील दायर की गई।

माननीय न्यायालय ने इस अपील को स्वीकार करते हुए आरोपियों को न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने के आदेश दिए। इसके विरुद्ध आरोपियों ने माननीय उच्च न्यायालय में अपील दायर की।

22 दिसंबर 2025 को हुई सुनवाई के पश्चात उच्च न्यायालय ने अपर जिला सत्र न्यायालय, भिवंडी के आदेश को बरकरार रखते हुए आरोपियों को 24 दिसंबर 2025 को प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट, जव्हार के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया।

आदेशानुसार दोनों आरोपी न्यायालय में उपस्थित हुए, जिसके बाद पुलिस द्वारा पुनः पुलिस हिरासत की मांग किए जाने पर माननीय न्यायालय ने उन्हें 29 दिसंबर 2025 तक पुलिस हिरासत में भेजने के आदेश दिए।

इस सनसनीखेज आर्थिक अपराध की आगे की जांच पुलिस निरीक्षक श्री शिरीष पवार, आर्थिक अपराध शाखा, पालघर द्वारा की जा रही है। जांच में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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