सामाजिक, आर्थिक एवं आजीविका के दृष्टिकोण से मछुआरों का सर्वेक्षण अत्यंत आवश्यक
जिलाधिकारी डॉ. इंदु रानी जाखड़
पालघर, 23 दिसंबर :
प्रस्तावित वाढवण बंदर परियोजना से प्रभावित क्षेत्र के मछुआरों का सामाजिक, आर्थिक एवं आजीविका से जुड़े पहलुओं पर विस्तृत सर्वेक्षण किया जाना अनिवार्य है, ऐसा प्रतिपादन जिलाधिकारी डॉ. इंदु रानी जाखड़ ने किया।
प्रस्तावित वाढवण बंदर परियोजना की पृष्ठभूमि में, प्रभावित क्षेत्र के मछुआरों के सघन, वैज्ञानिक एवं तथ्याधारित सर्वेक्षण को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय, पालघर में जिलाधिकारी डॉ. इंदु रानी जाखड़ की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में सर्वेक्षण के महत्व, आवश्यकता तथा उसकी नीति पर विस्तार से चर्चा की गई।
वरिष्ठ अधिकारियों एवं मछुआरा प्रतिनिधियों की उल्लेखनीय उपस्थिति
इस बैठक में पुलिस अधीक्षक यतीश देशमुख, उपजिलाधिकारी तेजस चव्हाण, महेश सागर, जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (JNPA) के सलाहकार राजीव सिन्हा, ठाणे–पालघर के सहायक आयुक्त (मत्स्य व्यवसाय) सहित विभिन्न संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
इसके साथ ही प्रभावित क्षेत्र की मछुआरा संस्थाओं के प्रतिनिधि एवं मछुआरा संगठनों के पदाधिकारी बड़ी संख्या में बैठक में शामिल हुए।
मछुआरों की वास्तविक स्थिति का दस्तावेजीकरण आवश्यक
जिलाधिकारी डॉ. इंदु रानी जाखड़ ने कहा कि प्रस्तावित वाढवण बंदर क्षेत्र के मछुआरों का सर्वेक्षण सामाजिक, आर्थिक एवं आजीविका के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि
मछुआरों की वास्तविक स्थिति का सटीक दस्तावेजीकरण
उनके अधिकारों की पहचान
आजीविका पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव
तथा भविष्य की नीतिगत निर्णय प्रक्रिया
के लिए यह सर्वेक्षण निर्णायक भूमिका निभाएगा।
सर्वेक्षण की प्रक्रिया एवं नीति पर विस्तृत विचार-विमर्श
बैठक के दौरान संबंधित विभागों के अधिकारियों, प्रभावित मछुआरा संस्थाओं एवं संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार प्रस्तुत किए।
सर्वेक्षण किस पद्धति से किया जाए, उसकी पारदर्शिता, विश्वसनीयता तथा नीतिगत ढांचे को लेकर विभिन्न बिंदुओं पर गहन चर्चा हुई।
इस अवसर पर जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (JNPA) के अधिकारियों ने प्राथमिक सर्वेक्षण की विस्तृत जानकारी देते हुए सर्वेक्षण प्रक्रिया की रूपरेखा स्पष्ट की।
सभी मछुआरों के सर्वेक्षण की मांग
बैठक के समापन पर प्रभावित क्षेत्र की मछुआरा संस्थाओं एवं संगठनों के प्रतिनिधियों ने यह स्पष्ट मांग रखी कि वर्तमान में प्रभावित 16 गांवों का सर्वेक्षण पूर्ण होने के पश्चात, प्रस्तावित वाढवण बंदर क्षेत्र के अन्य मछुआरों का भी सर्वेक्षण किया जाना आवश्यक है।
साथ ही, उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि JNPA द्वारा किए जाने वाले सर्वेक्षण कार्य में पूर्ण सहयोग प्रदान किया जाएगा।







