डहाणू तालुका अंतर्गत तवा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीन आने वाले धानिवरी स्वास्थ्य उपकेंद्र में ओसरवीरा पथक के डॉक्टर एवं कर्मचारियों की घोर लापरवाही के कारण एक गर्भवती महिला की हालत अत्यंत चिंताजनक हो गई है। इस चौंकाने वाली घटना ने स्वास्थ्य तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, वहीं ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है।
ओसरवीरा डोंगरीपाड़ा निवासी अनुसया रोहित वरठा नामक गर्भवती महिला को शुक्रवार, 12 दिसंबर को अचानक तेज पेट दर्द की शिकायत हुई। तत्काल चिकित्सकीय सहायता के लिए परिजनों ने ओसरवीरा पथक की डॉक्टर मोनाली सर्वगोड़ को चार से पांच बार फोन किया, लेकिन एक भी कॉल का जवाब नहीं मिला, ऐसा आरोप परिजनों ने लगाया है। इसके बाद जब धानिवरी उपकेंद्र के कर्मचारियों से संपर्क किया गया, तो स्पष्ट जानकारी देने के बजाय टालमटोल किया गया।
उपकेंद्र के कर्मचारी गवळी ने डॉक्टर के मीटिंग में होने की जानकारी दी। हालांकि, जब तवा पीएचसी कार्यालय से इसकी पुष्टि की गई, तो पता चला कि उस दिन कोई भी मीटिंग निर्धारित नहीं थी और न ही डॉक्टर का कोई अवकाश आवेदन कार्यालय में दर्ज था। आगे की जांच में डॉक्टर द्वारा छुट्टी लेने की बात कही गई, लेकिन अवकाश आवेदन बाद में व्हाट्सऐप के माध्यम से भेजे जाने का दावा किया गया।
गौरतलब है कि ओसरवीरा क्षेत्र में इससे पहले भी डॉक्टरों की लापरवाही के चलते एक गर्भवती महिला की मृत्यु हो चुकी है। इसके बावजूद ठोस कार्रवाई न होने से ऐसी घटनाएं बार-बार सामने आ रही हैं, ऐसा आरोप ग्रामीणों ने किया है। आदिवासी एवं दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग जोर पकड़ रही है।
कोट
“इस मामले की गहन जांच कर उचित रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी जाएगी। यदि कोई दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
डॉ. ऋग्वेद दुधात, तालुका चिकित्सा अधिकारी, डहाणू






