व्हाटअप्प ग्रुप ज्वाइन करने के लिए यहाँ क्लिक करे 👉
---Advertisement---

स्कूल के पहले ही दिन पालघर प्रशासन की अनूठी पहल; भूमि अधिकारों के प्रति जागरूकता के लिए कॉमिक बुक लॉन्च

On: Tuesday, June 16, 2026 2:23 PM
---Advertisement---

पालघर, १५ जून:
पालघर जिले में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ जहां स्कूलों में उत्साह का माहौल है, वहीं स्कूल के पहले ही दिन आदिवासी समाज में भूमि अधिकारों के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए एक अभिनव अभियान की शुरुआत की गई है।
जिलाधिकारी डॉ. इंदुराणी जाखड़ की संकल्पना से शुरू किए गए इस अनूठे अभियान के तहत विद्यार्थी अब अपने परिवारों तक जमीन के मालिकाना हक और कानूनी अधिकारों की महत्वपूर्ण जानकारी पहुंचाने वाले ‘परिवर्तन के दूत’ बनेंगे। इस अभियान के केंद्र बिंदु, “आपली जमीन, आपले हक्क” (हमारी जमीन, हमारे अधिकार) नामक विशेष कॉमिक पुस्तक को एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना (ITDP), डहाणू के परियोजना अधिकारी व सहायक जिलाधिकारी विशाल खत्री के मार्गदर्शन में तैयार किया गया है।

आदिवासी परिवारों को सशक्त बनाने की कोशिश

पीढ़ियों से कई आदिवासी परिवारों को पुराने जमीनी रिकॉर्ड, उत्तराधिकार (वारिसनामा) से जुड़े लंबित मामलों और कानूनी दस्तावेजों की सीमित जानकारी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसके कारण उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने, वन अधिकार प्राप्त करने और विभिन्न विकास परियोजनाओं से मिलने वाले लाभों को हासिल करने में कठिनाई होती है। इन्हीं चुनौतियों से निपटने के लिए स्कूलों को कानूनी साक्षरता और सामुदायिक सशक्तिकरण का केंद्र बनाने का उद्देश्य इस पहल के पीछे है।

चित्रों और कहानियों से समझाई कानूनी बातें

आकर्षक चित्रों और सरल कहानियों के माध्यम से यह कॉमिक बुक छात्रों को जमीनी रिकॉर्ड, उत्तराधिकार, वन अधिकार के दावों के साथ-साथ राजस्व दस्तावेजों को अपडेट रखने के महत्व के बारे में शिक्षित करती है। छात्रों को जागरूक करने के साथ-साथ उनके परिवारों में कानूनी अधिकारों और जिम्मेदारियों को लेकर एक सार्थक चर्चा शुरू करना इस अभियान का मुख्य लक्ष्य है। इस योजना के तहत लगभग ५,००० कॉमिक पुस्तकें छापी जा रही हैं, जिन्हें चरणबद्ध तरीके से जिले के जिला परिषद स्कूलों और आश्रमशालाओं में वितरित किया जाएगा। इससे हजारों आदिवासी परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा।

शिक्षकों को दी जाएगी ‘मास्टर ट्रेनर’ की ट्रेनिंग

इस अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए एक व्यवस्थित प्रशिक्षण ढांचा तैयार किया गया है। तलाठी, मंडल अधिकारी और नायब तहसीलदार सहित राजस्व विभाग के अधिकारी, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) के सहयोग से चुनिंदा शिक्षकों को ‘मास्टर ट्रेनर’ के रूप में प्रशिक्षित करेंगे। ये प्रशिक्षित शिक्षक आगे चलकर छात्रों और अन्य शिक्षकों को जमीनी रिकॉर्ड समझने तथा सत्यापन (वेरिफिकेशन) प्रक्रिया में मार्गदर्शन देंगे।

अगस्त में आयोजित होंगे विशेष शिविर

आगामी अगस्त महीने में आयोजित होने वाले वार्षिक राजस्व सप्ताह (महसूल सप्ताह) के दौरान इस अभियान को और गति दी जाएगी। इसके तहत स्कूलों में विशेष कार्यशालाएं और सत्यापन शिविर आयोजित किए जाएंगे। छात्रों को अपने परिवारों के ७/१२ (सात-बारा) उतारे, वन अधिकारों से संबंधित दस्तावेज और अन्य आवश्यक कागजात स्कूल लाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे राजस्व अधिकारियों को मौके पर ही दस्तावेजों के सत्यापन और उन्हें अपडेट करने में आसानी होगी।

गतिशील प्रशासन (EGI) की पहल

‘गतिशील प्रशासन’ (Expedited Governance Initiative – EGI) के अंतर्गत समर्थित यह अभियान उपलब्ध शैक्षणिक और प्रशासनिक संसाधनों के प्रभावी उपयोग पर जोर देता है। कानूनी जागरूकता को स्कूली व्यवस्था से जोड़कर भूमि अधिकारों को सुरक्षित करना और सरकारी लाभों तक लोगों की पहुंच बढ़ाना ही प्रशासन का दीर्घकालिक लक्ष्य है।

इस अवसर पर बोलते हुए

जिलाधिकारी डॉ. इंदुराणी जाखड़ ने कहा:
“यदि छात्रों को ज्ञान के माध्यम से सक्षम बनाया जाए, तो इसका सकारात्मक प्रभाव पूरे समाज पर दिखाई देता है। जब छात्रों को उनके अधिकारों का एहसास होता है, तब वे अपने परिवारों और गांवों में जागरूकता फैलाने का सबसे प्रभावी माध्यम बनते हैं।”

Join WhatsApp

Join Now

---Advertisement---