
पालघर:
आदिवासी समाज के सर्वांगीण विकास, उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और केंद्र सरकार के ‘विकसित भारत’ के सपने को सच करने के लिए पालघर जिले में एक बेहद सराहनीय पहल की गई है। जिले में ‘जनभागीदारी अभियान’ के अंतर्गत ‘जनजातीय गरिमा उत्सव’ की शुरुआत बेहद उत्साह और उमंग के साथ की गई।
प्रशासन ने इस अभियान के लिए “सबसे दूर, सबसे पहले“ का मूलमंत्र तय किया है। इसका सीधा उद्देश्य यह है कि जिले के सबसे दुर्गम और पिछड़े इलाकों में रहने वाले आखिरी आदिवासी परिवार तक भी सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा के सबसे पहले पहुंचे।
वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ भव्य शुभारंभ
इस विशेष अभियान की शुरुआत पालघर के जिलाधिकारी कार्यालय में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता निवासी उप-जिलाधिकारी सुभाष भागडे ने की। वहीं, परियोजना अधिकारी तथा सहायक जिलाधिकारी डॉ. विशाल खत्री और डॉ. अपूर्वा बासुर के कर-कमलों द्वारा इस गरिमापूर्ण अभियान का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर उप-जिलाधिकारी रणजीत देसाई और उप-मुख्य कार्यकारी अधिकारी अशोक पाटिल सहित जव्हार और डहाणू परियोजना के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
सरकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ देने पर जोर
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचाना है। इसके लिए प्रशासन निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष ध्यान दे रहा है:
शत-प्रतिशत लाभ (100% सैचुरेशन):
‘पीएम-जनमन’ (PM-JANMAN) और ‘धरती आबा अभियान’ के माध्यम से जिले के हर पात्र आदिवासी परिवार को चिन्हित कर उन्हें सभी सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ दिया जाएगा।
मौके पर ही समस्याओं का समाधान:
अभियान के दौरान जगह-जगह ‘जनसुनवाई’ (जनता दरबार) का आयोजन किया जाएगा, ताकि ग्रामीणों की समस्याओं, शिकायतों और प्रशासनिक अड़चनों का मौके पर ही निपटारा किया जा सके।
स्वास्थ्य जांच और जागरूकता: गांवों में विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाए जा रहे हैं। इनमें विशेष रूप से आदिवासी क्षेत्रों में पाई जाने वाली ‘सिकल सेल’ (रक्त से जुड़ी बीमारी) की जांच और इसके प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए विशेष मुहिम चलाई जाएगी।
‘आदि सेवा केंद्र’ (ASK) बनेगा ग्रामीणों का मददगार
आदिवासी भाई-बहनों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने और उनकी प्रशासनिक समस्याओं को गांव के स्तर पर ही हल करने के लिए प्रशासन एक अनूठी पहल कर रहा है। इसके तहत ग्राम स्तर पर ‘आदि सेवा केंद्र’ (ASK) की स्थापना की जाएगी। यह केंद्र केवल एक प्रशासनिक दफ्तर नहीं, बल्कि ग्रामीण स्तर पर आदिवासियों को सम्मान और न्याय दिलाने का एक मजबूत मंच साबित होगा।
8 तालुकों के 654 गांवों में चलेगा अभियान
यह अभियान पालघर जिले के भौगोलिक रूप से कठिन और बड़े क्षेत्र को कवर करेगा। जिले के कुल आठ तालुकों को इसमें शामिल किया गया है, जो इस प्रकार हैं:
- जव्हार
- मोखाडा
- विक्रमगड
- वाडा
- पालघर
- डहाणू
- तलासरी
- वसई
इन सभी ८ तालुकों के कुल 654 गांवों में इस अभियान को पूरी ताकत के साथ लागू किया जा रहा है। अभियान को पूरी तरह सफल बनाने के लिए नियुक्त किए गए सभी नोडल अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे यह सुनिश्चित करें कि गांव का एक भी पात्र व्यक्ति योजना के लाभ से वंचित न रहे।
प्रशासन का संकल्प और नया सवेरा
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने भावुक और दृढ़ शब्दों में कहा कि आदिवासी संस्कृति का पूरा सम्मान करते हुए विकास की गंगा को हर घर के आंगन तक पहुंचाना ही इस सरकार और प्रशासन का अंतिम लक्ष्य है। उपस्थित जानकारों का मानना है कि यह ‘जनभागीदारी अभियान’ पालघर जिले के आदिवासी विकास के इतिहास में एक नए और सुनहरे युग की शुरुआत (नांदी) साबित होगा।
नागरिकों से विशेष अपील: उठाएं शिविर का लाभ
प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह विशेष शिविर 18 मई से 25 मई तक लगातार आयोजित किया जा रहा है। पालघर प्रशासन ने जिले के सभी आदिवासी भाई-बहनों से अपील की है कि वे इस शिविर में भारी संख्या में हिस्सा लें। शिविर में आकर अपने जरूरी दस्तावेज, जैसे—जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, और आधार कार्ड आदि से जुड़े काम तुरंत पूरे करवा लें, ताकि भविष्य में किसी भी सरकारी योजना का लाभ सीधे आपके बैंक खाते या आप तक आसानी से पहुंच सके।






